Bap-Dada's LATEST & FINAL part

DEDICATED to Om Mandli ‘Godly Mission’ to present posts regarding the LATEST & FINAL part of BapDada of World Purification & World TRANSFORMATION – through Divine Mother Devaki - SAME soul of 'Mateshwari', Saraswati Mama.
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Bap-Dada's LATEST & FINAL part

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प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की वाणी 16.03.2020
(देवकी बहन द्वारा)

प्रश्न :- मुरली में कहा है, ‘पवित्र कन्या के तन में आऊं, यह कायदा नहीं है’ - तो बाबा ने गुलजार दादी, और यह तीसरा तन, कन्या का कैसे लिया?

उत्तर :- बिलकुल सही कहा था। जब आदि में हमारा प्यारा (शिव) बाबा पहली बार परमधाम से इस दुनिया में पधरामणि लेते हैं, तो कन्या का तन नहीं ले सकते - यह कायदा नहीं है! क्योंकि बाबा ग्रहस्थ आश्रम, यानी पवित्र ग्रहस्थ धर्म स्थापन करने आते हैं, तो बाबा सबसे पहले - फर्स्ट तन - पतीत वाला, ग्रहस्ती, अनुभवी, बूढा तन लेते हैं। कन्या का तन नहीं ले सकते! इसलिए मुरली में कहा था कि ब्रह्मा का तन ही मुकरर है - किसी कन्या का तन मुकरर नहीं है। इसी का गायन है कि ‘ब्रह्मा द्वारा सृष्टि रची’ - ऐसा नहीं कह सकते कि ‘कन्या द्वारा सृष्टि रची गयी’। इसलिए बाबा सबसे पहले अनुभवी, ग्रहस्ती वाला बूढा तन लेते हैं - किसी जवान का कोई गायन नहीं है।

फिर कहेंगे कि शोभा बच्ची, यानी दादी गुलजार का तन कैसे ले लिया? वो भी तो कन्या है!
कन्या का तन लेना भी बहुत जरूरी है। क्योंकि बाप नर और नारी को समान दर्जा देता है ना! नहीं तो फिर कहेंगे कि आखिर में, भगवान ने भी पुरुष को ही आगे रखा! स्त्री कहाँ गयी? इसलिए कन्या का तन लेना भी जरूरी है। परन्तु मुकरर रथ ग्रहस्ती वाला, पतीत वाला, ही रखते हैं। दूसरा तन - दादी गुलजार का - फर्स्ट तन नहीं था - वो नेक्स्ट तन था। दूसरा तन था - फर्स्ट तन नहीं था। अगर बाप कन्या का तन नहीं लेता, तो इतना बड़ा स्वर्ग स्थापन कैसे होगा? अगर उस टाइम - आदि में - कन्या का तन लेते, तो फिर सब कन्यायें ही आवेंगी - फिर कहेंगे कि ‘इस कन्या को थोड़ेही बच्चे पालने हैं - जो ज्ञान देती है बैठ के?’ इसलिए बूढ़े तन का ही गायन है - कोई जवान तन का गायन नहीं है!
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Re: Bap-Dada's LATEST & FINAL part

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Zorba the Greek
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Bap-Dada's LATEST & FINAL part

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Versions of PrajaPita Brahma Baba 16.03.2020
(through Divine Sister Devki)

Question: It has been said in the Murli, ‘It is NOT the Law (for ShivBaba) to come into the body of a Pure Kumari’ – so how did (Shiv) Baba take the body of Dadi Gulzar, and this third Chariot (Sister Devki) of a Kumari?

Answer: It was said CORRECTLY. When our Loving (Shiv) Baba FIRST comes from the Supreme Abode and incarnates into this world in the very beginning (of Confluence Age), He CANNOT take the body of a Kumari – this is NOT the Law! Since (Shiv) Baba comes to establish a house-hold ashram - that is, a Pure house-hold Religion – therefore, (Shiv) Baba FIRST of ALL takes the (very) FIRST body of an elderly, experienced, impure house-holder (impure body of Dada Lekhraj – who is the SAME soul of Shri Krishna of the very beginning of Golden Age). He CANNOT take the body of a Kumari (the VERY FIRST time, when He FIRST incarnates)! This is why it was said in the Murli that ONLY the body of Brahma (soul of Dada Lekhraj) is FIXED (as the APPOINTED Chariot of ShivBaba) – the body of ANY Kumari is NOT fixed (for SUCH incarnation - for the VERY FIRST time). There is the praise of this, that ‘the world was created through Brahma’ – it CANNOT be said that ‘the world was created through a Kumari’. This is why (Shiv) Baba, FIRST of ALL, takes an elderly, experienced body of a house-holder – there is NO praise of ANY youth (young person – with regard to this aspect).

Then they ask how He (Shiv Baba) took the body of the child Shobha, that is Dadi Gulzar (her ‘lokik’ name was ‘Shobha’), since she too was a Kumari!
It is ALSO necessary to take the body of a Kumari (female), because the Father (Shiv Baba) gives EQUAL status to a male and a female (since the soul is neither EXCLUSIVELY male or female – and has BOTH sanskars within)! Otherwise, they would then say that EVEN God kept ONLY a man (male) in front (and NOT a woman, or female)! What about a woman (female)? This is why it is ALSO necessary to take the body of a Kumari (female). But He keeps an impure house-holder as His FIXED (APPOINTED) Chariot. The second body of Dadi Gulzar was NOT the FIRST body – it was the NEXT body. It was the SECOND body, and NOT the FIRST body. If He did not take the body of a Kumari (AFTER Brahma Baba became Avyakt, and left his corporeal body) then how could such a GREAT Heaven be established? If at THAT time – in the beginning (of Confluence Age) – He would have taken the body of a Kumari, then ONLY all the Kumaris would have come – and then they would say that ‘this Kumari, who is sitting and giving Knowledge, does not have to sustain children’! This is why there is the praise of ONLY an ELDERLY body (as Brahma) – there is NO praise of a young body (as Brahma)!
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प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की वाणी
08.01.2021
(देवकी बहन द्वारा - श्री कृष्ण को जन्म देने वाली भारत-माता)*

"अंतिम समय का पार्ट है दृष्टि का।"

“सभी धर्मों की एक पुकार, परमात्मा है निराकार”। एक बारी पढा, दिल में बैठ गया! ठीक है ना? देखो बच्चे, भल कोई मिले ना मिले .. भल मेजोरिटी पर .. अपने बाबा की दृष्टि तो हर एक बच्चे पर पड़ेंगी ही .. यह तो (शिव) बाबा ने क्या कहा है? अंतिम समय का पार्ट है दृष्टि का। अब मधुबन में बाबा ने कहा कि अंतिम समय का पार्ट दृष्टि का है .. पर क्या हुआ? नहीं हुआ ना .. नहीं हुआ .. तो फिर बताओ .. अगर होगा ही नहीं, तो फिर यह तो परमात्मा फिर झूठे पड़ गए! गलत हो जाएगा ना? भई परमात्मा वायदा करता है बैठकर .. बच्चों, अंतिम समय का पार्ट दृष्टि का चलेंगा, नजरों से निहाल करेंगे! अगर वो ही नहीं हुआ, तो फिर परमात्मा तो झूठा पड़ गया! और बाप कभी झूठ बोल नहीं सकता। बाप ट्रूथ है, सत्य है .. और ‘सत्यम-शिवम-सुंदरम’ है - तो वह सत्य कभी झूठ का सहारा तो नहीं लेंगे ना? तो जब तक बाप ने जो-जो कहा है, वो-वो पूरा नहीं होता, तब तक बाबा परमधाम में जाएगा भी नहीं .. देखेंगा भी नहीं। केहते हैं ना .. जाऊंगा, तो अपना लक्ष्य पूरा करके ही जाऊंगा।

अब यह तो सिद्धांत नहीं है ना कि बाबा मधुबन में ही आएंगा। भई, एक बात बतावे .. मंदिर में बैठने वाले भक्त .. वो वहाँ बैठकर भी याद कर रहे हैं, तो क्या बाबा वहाँ नहीं जाएंगा? क्या वो बच्चे नहीं हैं बाप के? जो सन्यासी इतने समय से पहाड़ों में बैठकर, बर्फ में बैठकर, तपस्या कर रहे हैं .. क्या उनसे नहीं मिलेगा? जरूर मिलना चाहिए ना। अगर कहेंगे कि एक ही स्थान पर परमात्मा बंधा हुआ है .. तो फिर यह किसी शास्त्र में भी नहीं है .. फिर न किसी वेद-पुराण में है। यह किसी मुरली में भी नहीं है। अब कहते .. ‘नहीं, बाबा मधुबन में ही आएगा, और कहीं आ नहीं सकता’ .. तो बाबा कहेगा, बाबा तो कोलकाता में भी आया .. बाबा ने तो कराची से पार्ट शुरू किया .. बाबा तो दिल्ली में भी आया। कितनी जगह गिनवाएँगे। बाबा तो एक-एक बच्चे के लिए भी आया। बाबा तो एक छोटे से स्थान पर भी आया। आया ना? जब अपन (ब्रह्मा बाबा) जाते थे .. कहाँ कहाँ चक्कर लगाने, तो (शिव) बाबा आते थे .. क्या गिनवाएँगे? .. कितने स्थान पर बाबा आया। और अगर यह कहे कि सिर्फ मधुबन में ही आएंगा .. अपन (ब्रह्मा बाबा) यह कहेगा .. उनसे बड़े महामूर्ख कोई नहीं है .. एकदम सामने से बोल रहे हैं कि ‘एक ही स्थान पर भगवान का पार्ट चलता है’! पूरी सृष्टि किसकी है? चलाने वाला कौन है? और अगर कहेंगे पूरी सृष्टि में, जब बच्चों के प्यार में, बाप परमधाम छोड़ सकता है .. बुद्धि में सोचना .. जब बच्चों के प्यार में .. दुख, तकलीफ में .. इतना प्यारा घर, जहाँ परमपिता परमात्मा का वास है .. उसको छोड़ सकता है - तो क्या कराची को, कोलकाता को, मधुबन को नहीं छोड़ सकता?? क्या मधुबन को नहीं छोड़ सकता??

छोड़ने की बात दूसरी है। अब छोड़ना माना क्या? छोड़ना माना यह नहीं .. कि भई, चलो बच्चे इतने बैठे हैं, जो अभी तक नहीं मिले हैं .. जो अभी जिनका पार्ट अभी तक पूरा नहीं खुला है, नहीं आए हैं .. जो एक कोने-कोने में बैठकर चिल्ला रहे हैं .. वो कहाँ जाएंगे? कहाँ जाएंगे? क्या उनसे नहीं मिलेंगे? जरुर मिलेंगे! हर एक कोने में बैठकर बच्चे क्या बोलते हैं? ‘हम ना .. ढूँढ-ढूँढ कर थक गए हैं। अब हमारे पैर दुखने लग गए हैं, टिपरी घिस गई है, हम नहीं आएंगे .. आपको प्यार है ना .. तो आप आ जाओ’। ऐसे बच्चे पुकार रहे हैं। ऐसे बच्चे बोल रहे हैं .. ‘भई, हमें तो प्यार है, पर हम अब थक गए हैं, अब ढूँढ नहीं पाएंगे - अगर आपको प्यार है, तो आप आ जाओ, और हमसे मिल लो’। तो बाप उन बच्चों को क्या कहता है .. ठीक है, आप तैयारी करो - और बाप पहुँच रहा है! ऐसे बच्चे कह रहे हैं .. जिनको आपने भी नहीं देखा .. ऐसा-ऐसा स्थान है .. तो बाबा जाएंगा .. मिलेंगा। यह पूरा विश्व बाप का है, बाप का अधिकार है .. पर प्यार में, बाप को बांध लो .. अधिकार में पकड़ कर बैठेंगे .. ‘नहीं-नहीं, आप कहीं जाओगे नहीं, इधर ही बैठे रहो’ .. तो बाप तो हवा है .. चाहे कितनी भी मुट्ठी कस के पकड़ लो .. निकलना उसको आता है। तो यह तो भूल जावे कि बाबा एक ही स्थान पर आएगा।

ठीक है ना, बच्चों!
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बापदादा मिलन - 09.06.2021

(देवकी बहन द्वारा - श्री कृष्ण को जन्म देने वाली भारत-माता - जगदम्बा)

Baapdada Milan - 09.06.2021

(through Sister Devki - Bharat Mata - JagadAmba - who gives birth to Shri Krishna)

https://youtu.be/RDJxqSys5-4

Baapdada Milan - 09.06.2021
Zorba the Greek
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Versions of PrajaPita Brahma
08.01.2021
(through Sister Devki‘Bharat Mata’ who gives birth to Shri Krishna)

‘The final part (of Shiv Baba) is of giving dhristi’!

‘The slogan of all religions is - God is Incorporeal’. You read it once, and it gets registered within your heart! This is right, is it not? Look children, whether everyone meets (the Father) or not .. for the majority .. the Father’s vision will definitely fall on each and every child .. What did (Shiv) Baba say? The final part is of giving ‘dhristi’ (showering Divine Light on every child). So, Baba said in Madhuban that the final part is of giving ‘dhristi’ .. but what happened? It did not happen, did it? .. it did not happen .. if it does not happen at all, then the Father would be a liar! This would be wrong, is it not? God sits and makes a promise .. children, the final part will be of giving ‘dhristi’, He will take you BEYOND with just a GLANCE! If that has NOT taken place, then God would become a liar! The Father can NEVER tell lies. God is Truth, He is TRUE .. and He is ‘Truthful, Benevolent & Beautiful’ – therefore He is TRUE, and He will NEVER take the support of a lie! UNTIL He fulfills everything which He has promised, He will not go back to Paramdham .. He has said .. when I go, I will accomplish my objective, and then go.

It is not a rule that Baba will ONLY come in Madhuban. Just consider this .. when devotees sit in a temple .. they sit there and remember Him - will Baba not go there? Are they not God's children also? Will the Father not meet the sannyasis who are doing penance, sitting on the mountains in snow? He should definitely meet them, is it not? If they say that God is bound to only one place .. but this is not written in any Scripture .. nor in the Vedas, or Puranas. It is not EVEN mentioned in any Murli.
They say .. ‘No, (Shiv) Baba can ONLY come in Madhuban, He CANNOT come anywhere else’ .. So,
Baba says .. Baba came in Kolkata also .. Baba started His part from Karachi .. Baba came in Delhi also.
How many places should He count? Baba came for an individual child also. Baba came in the smallest of places also. He did come, did He not? When I (Brahma Baba) used to go around to different places, then too (Shiv) Baba would come .. how would one keep a count? Baba came in so MANY places. And, if they say that He can ONLY come in Madhuban .. I (Brahma Baba) would say .. NO ONE can be MORE FOOLISH than them .. They say out in front (with pride), that ‘the part of God takes place ONLY in ONE place’! The whole world belongs to whom? Who is the one who runs it? So, just consider within your intellects .. if the Father can leave His Supreme Abode for the sake of His Love for the children in this whole world .. when He can leave such a Loving Home, where the Supreme Father Supreme Soul resides, for the sake of His Love for the children who are in sorrow and difficulties – then can He not leave Karachi, or Kolkata, or Madhuban? Can He not leave Madhuban?

‘To leave’ is another matter. What does it mean ‘to leave’? ‘To leave’ does not mean (to leave PERMANENTLY) .. so many children are sitting, who have still not met Him till now .. those who have not come, since their part has still not fully opened as yet .. those who are sitting in different corners and crying out .. where will they go? Where will they go? Will He not meet them? He will definitely meet them! What do the children sitting in every corner say? ‘We are tired of constantly searching for you; our feet are now hurting, our soles are worn out, we cannot come to You .. You do Love us, do you not .. so, You come to meet us’. Children are calling out in this manner. Such children are saying .. ‘we do Love You, but we have now become tired, we will not be able to find You now – if You do Love us, then You come, and meet us’. So, what does the Father tell such children .. OK, you make arrangements - and the Father will reach there! Such children are saying – whom you too have not seen .. there are such places .. so Baba will go .. He will meet them. This whole world belongs to the Father, and the Father has the right .. you can tie the Father with your Love .. but if you catch hold of Him and sit, (and say) .. ‘no, no, you CANNOT go anywhere else, just sit ONLY here’ .. but the Father is like the wind .. how much ever you may hold Him in your fist tightly .. He knows how to escape. So, FORGET that Baba will come to ONLY ONE place!

OK, children?
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18.01.2021
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‘भारत-माता शिव-शक्ति अवतार - अंत का यही नारा है।’

... ‘भारत-माता शिव-शक्ति अवतार - अंत का यही नारा है।’ ... भारत की महिमा कब हुई? देखिए, जब भारत की भूमि पर भगवान आते हैं तो भारत की महिमा होती है। अंतिम समय का यह नारा .. सबसे अलग ये कौन जा रहे हैं? .. ये ‘ओम मंडली रिचेस्ट इन द वर्ल्ड’ के बच्चे जा रहे हैं .. ‘शिव-शक्तियाँ’ जा रही हैं .. ‘पांडव-सेना’ जा रहे हैं। अब अंतिम समय पूरा विश्व आपके पीछे होंगा .. क्योंकि अब नारा लगेगा .. ‘विश्व शांति’ का नारा .. ठीक है ना? बाप आए हैं पूरे भारत को सिलने के लिए। क्या करने के लिए? सिलने के लिए .. सब फट गए ना! सब कपड़े अलग-अलग हो गए। और बाप अभी क्या करने आए हैं? सबको जोड़ने के लिए आए हैं। अब पूरे विश्व में हर एक के दिल से निकलेंगा, मुख से निकलेंगा – ‘मेरा बाबा आ गया’ .. ‘प्यारा बाबा आ गया’। ...

कहाँ, कहाँ सभी रो रहे हैं .. और यहाँ सभी बैठके हँस रहे हैं .. क्यों हँस रहे हैं? क्योंकि पेपर में पास हो गए हैं। यह सभा कौनसी है? पेपर में पास होने वालों की सभा है। कौनसा पेपर है? बाप की पहचान का पेपर। भल कोई कहे .. नहीं है; कोई कहे .. है; कोई फिर कहे .. हो नहीं सकता! अब यह बताओ .. इस विश्व में, संसार में ऐसी कौन सी वस्तु है, कौनसी चीज ऐसी है, जो नहीं हो सकती हो? कोई ऐसा कर्तव्य है? जब सतयुग से कलियुग .. कलियुग, सतयुग हो सकता है .. तो क्या नहीं हो सकता? पूरा विश्व परिवर्तन हो सकता है .. तो क्या नहीं हो सकता? और जब, जहाँ बच्चा बैठकर बाप को पुकारे .. तो क्या वहाँ बाप नहीं हो सकता? कहते हैं ना .. भक्ति मार्ग में एक चीज है .. ‘भक्त, भावना और भगवान’। तीनों की राशि एक है ना .. जहाँ भक्त हैं, वहाँ भावना है .. और वहीं फिर भगवान भी होता है। पूरी फैमिली एक साथ होती है ना! ‘भक्त’ - बच्चा, ‘भावना’ - माता, और ‘भगवान’ - पिता .. तीनों आ गए .. और देखो .. बाप, बच्चे .. और यह जो मिलन है, यह भक्त और भगवान का नहीं है, यह किनका है? बाप और बच्चों का! देखो ..भक्त क्या करते हैं .. भक्ती करते हैं .. पर समझते क्या हैं .. कि मैं भगवान के चरणों की धूल हूँ .. दास हूँ। यही समझते हैं ना? लेकिन बाप क्या केहते हैं .. बच्चे, बाप के गले का हार हैं .. बच्चे, बाप के सिरताज हैं। हर एक बच्चा बाप को कैसा चाहिए, अभी – ‘वफादार’! कौनसा बच्चा चाहिए .. दिल से वफादारी, बाप के प्रति! कुछ भी नहीं .. खाली कर दो मन को .. ‘हम ऐसे करेंगे, तो हम इतना आगे जाएंगे’ .. नहीं! ‘मुझे मेरे बाप के दिल पर चढ़ना है .. तो मैं अपने बाप के दिल पर चढ़ गया, तो मैं सबसे आगे जाऊंगा’। ठीक है ना .. अगर सुख-शांति का परिवार बनाना है, तो दिल को साफ करो। दिल में एक दिलाराम को बैठाओ .. और बाप के प्रति वफादार। आज से पहले जो भी हुआ हो .. चलो छोड़ दो .. पर आज के बाद क्या करेंगे? ‘वफादार’ .. माने क्या लिस्ट निकालो .. ‘वफादार’ किसको कहते हैं? ‘फरमानबरदार’ किसको कहते हैं? ‘सच्ची दिलवाले’ किसको कहते हैं? क्योंकि यह जो स्थान है, एकदम साफ, सुथरा, बिल्कुल प्लेन है। यहाँ भल बच्चे भोले हैं, पर बाप तो बाप है ना!
भोले बच्चे हैं .. और बाबा को क्या चाहिए। हर बारी बाबा जीतनी बारी भी आएंगा, यही कहेंगा .. अपन को भोले बच्चे चाहिए। कौन से बच्चे? भोले बच्चे .. भोलेनाथ के भोले बच्चे चाहिए। खाली कर दो इधर से .. साफ कर दो। ‘मैं कुछ नहीं हूँ .. ना मैं जानता हूँ अपने आप को .. मैं जानता अपने बाप को हूँ .. और मैं पूरे विश्व में किसी को नहीं जानता .. बस, अब मुझे पुरे विश्व में बाप का परिचय देना है’। ठीक है, बच्चों?

बाप की प्रत्यक्षता हो गई? हो गई है, तो बतावे .. हाथ खड़ा करें। हो गई, या होगी? होगी ना .. तो बाप फिर परमधाम में क्या करेगा जाके। जाएंगा? बाप की प्रत्यक्षता नहीं हुई, तो बाबा ऊपर क्या करेंगा? आजकल जो भी मुरली आती है .. भल पढ़ो, सभी बच्चे पढ़ो .. पर उसमें भी क्या आता है? सब अच्छे से छाँट के .. अच्छे से निकालके, अच्छे से .. पर कोई बात नहीं .. मुरली तो बाप की है, यह सोच कर पढ़ो। पर अगर किसमें यह लिखा है कि ‘बाप मधुबन के अलावा कहीं और नहीं आ सकता’ - तो इसमें अपन कांटा लगाते हैं। पूरा कांटा .. क्योंकि बाप कहाँ-कहाँ आया? बाप का कर्तव्य कहाँ-कहाँ चला? पहले पूछते हैं .. मधुबन ने बाप को बनाया, या बाप ने मधुबन को बनाया? (बाप ने मधुबन को बनाया) पक्का? पहले मधुबन था? (नहीं) तो किसने बनाया .. बाप ने बनाया। सभी बच्चों के साथ मिलके बनाया। तो जब बच्चों के लिए मधुबन बना सकता है, तो बच्चों के लिए मधुबन छोड़ने में देरी थोड़ी लगेंगी! तो बच्चों के लिए बाप 10 मधुबन और बना सकता है। तो यह बाप का प्यार है। और अब कहे .. मधुबन बन चुके हैं .. बस आपकी यात्रा की बारी है। ऐसे-ऐसे हर स्थान पर सब कुछ तैयारी हो चुकी है। अच्छा बच्चे, खुशी में डांस करो, नाचो, गाओ ...

पूरे विश्व में .. यह ओम मंडली है। कौन सी मंडली है? जब बाप ने स्थापना किया है तो अधूरा छोड़के थोड़ी जाएंगे, भई पूरा करके जाएंगे। भल जन्म मिले ना मिले .. पर शरीर तो मिल गया .. और तीनों (परमात्मा, जगत-पिता, और जगदम्बा – शिव बाबा, ब्रह्मा बाबा, और सरस्वती मम्मा) एक साथ हो गए .. और जब तीनों एक साथ हैं, तो कर्तव्य बहुत जल्दी पूरा होंगा। तैयार हो ना? सभी तैयार हैं? यह तो नहीं कहेंगे .. ‘नहीं-नहीं, अभी थोड़ा रेस्ट कर लें बाबा, थोड़ा बाद में करेंगे’। इस शिवरात्रि चारों तरफ बाप का परिचय पहुँच जावे। बाप की दृष्टि भी पड़ी, तो बहुत कल्याण है। अंतिम समय का जो बाप ने वायदा किया है ना .. कौनसा वायदा किया है? पूरे विश्व में दृष्टि का पार्ट चलेगा .. पूरे विश्व में सभी आत्माओं पर बाप की दृष्टि पड़ेंगी .. और दृष्टि से वंचित तो कोई रहेगा नहीं .. तो यह समय अभी नजदीक आ गया है।

ठीक है, बच्चों?
Zorba the Greek
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Re: Bap-Dada's LATEST & FINAL part

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18.01.2021
(through Sister Devki – ‘Jagadamba’ - ‘Bharat Mata’ - who gives birth to Shri Krishna)

‘The final slogan is – advent of Bharat-Mata Shiv-Shakti’!

... The final slogan is – ‘advent of Bharat-Mata Shiv-Shakti’! ... When was Bharat praised? Look, Bharat is praised when God comes in the land of Bharat. This slogan is of the final period .. who are these who are going ahead, by themselves? .. These are the children of ‘Om Mandli – RICHEST in the world’ .. ‘Shiv-Shaktis’ are moving ahead .. ‘Pandav Army’ is moving ahead. Now, in the final period, the whole world will be behind you .. because now there will be the slogan .. the slogan of ‘World Peace’ .. OK? The Father has come to SEW the whole of Bharat. Why has He come? He has come to SEW .. everyone has been torn apart, is it not? All the clothes have become separated. So, what has the Father come to do now? He has come to REUNITE everyone. Now, in the whole world, these words will emerge from the hearts of everyone, from the mouths of everyone – ‘My Baba has come’ .. ‘My Loving Baba has come’! ...

Many are crying somewhere or the other .. and everyone here is sitting and laughing .. why are you laughing? Because you have passed in the paper (examination). Which gathering is this? This is the gathering of those who have passed in the paper (examination). Which paper? The paper of ReCognizing the Father! Some may say .. this is not Him; some may say .. this is Him; then, some may say .. this CANNOT be Him! Now, tell me .. what is there in this world which cannot be (cannot take place)? Is there any such activity? When there can be Kaliyug from Satyug .. and Kaliyug can change to Satyug .. then what cannot take place? If the whole world can be transformed .. then what cannot take place? And now, wherever a child is sitting and invoking the Father .. can the Father not reach there? They say .. there is a saying on the path of devotion .. ‘devotee, feeling, and God’. The sense of all three is similar .. where there are devotees, there are feelings .. and God is also present there. The whole family is together .. ‘devotee’ – child, ‘feeling’ – Mother, and ‘God’ – Father .. all three are present .. and just see .. Father and children .. and this meeting is not of devotees and God – whose meeting is this? .. This is the meeting of the Father and the children!

Look .. what do the devotees do .. they perform devotion .. but what do they think .. that I am the dust of God’s feet .. I am a servant. They feel this way, is it not? But what does the Father say .. children are the Garland around the Father’s Neck .. children are the Crown of the Father’s Head. How does the Father want every child to be, now – LOYAL! Which children are required .. those who are LOYAL from the heart towards the Father! There should be NOTHING .. empty the mind .. ‘If we do this, then we will go so much ahead’ .. NO! ‘I have to climb onto the Father’s Heart .. if I climb onto the Heart of my Father, then I will go ahead of everyone’. OK? .. If a happy and peaceful Family is to be created, then purify your heart. Make the ‘Comforter of Hearts’ sit within your heart .. and be LOYAL towards the Father. Whatever has happened before today .. leave that alone .. but what will you do after today? Be LOYAL .. what lists should you make .. who is called ‘loyal’? .. who is called ‘obedient’? .. who is called one with a ‘TRUE heart’? Because this place is absolutely clean, clear, and plain. Although the children here are innocent, but the Father is the Father!
The children are innocent .. and whom does Baba want? Every time, no matter how many times Baba comes, He would say .. I want INNOCENT children. Which children? INNOCENT children .. INNOCENT children of the INNOCENT Lord. Empty everything .. clear everything. ‘I am nothing .. nor do I know my own self .. I ONLY know my Father .. and I do not know ANYONE ELSE in the whole world .. now, I have to give the introduction of the Father in the whole world’. OK, children?

Has the revelation of the Father taken place? If it has taken place, then say so .. raise your hands. Has it taken place .. or has it to take place? It has to take place, is it not? .. So, what would Baba do in the Supreme Abode by going there? Would He go there? The revelation of the Father has not taken place (as yet), so what would Baba do up there? Nowadays, whichever Murli comes .. do study, all children do study .. but what is presented therein? All points which have been sorted out .. which have been very well selected, very well .. but that does not matter .. do study the Murli with the thought that it belongs to the Father. But, if ANYWHERE it is written that ‘Baba CANNOT come ANYWHERE else, OTHER than in Madhuban’ – then this would be like putting a THORN in it (in the Murli) .. a COMPLETE THORN .. because Baba came in so many places! Baba’s activity took place in so many places! First, I ask .. did Madhuban make the Father, or did the Father make Madhuban? (the Father made Madhuban). Certain? Was there Madhuban before? (No). So, who made Madhuban .. the Father made Madhuban. He made Madhuban together with all the children. So, if He can make Madhuban for the sake of the children; therefore, He would not take long to leave Madhuban for the sake of the children! The Father can make 10 more Madhubans for the sake of the children. So, this is the Love of the Father (for His children). And now He says .. Madhubans have been made .. it is your turn to travel. In this way, everything has been prepared at every place. OK children, dance in Happiness, dance and sing ...

In the whole world .. this is Om Mandli. Which Mandli (Circle – or Spiritual gathering) is this? When the Father is establishing, then He would not leave when it is still incomplete, He will complete it and then leave. Although I have not taken birth, but I have got (the support of) a body .. and ALL THREE (Supreme Soul, World Father, and World Mother – Shiv Baba, Brahma Baba, and Saraswati Mama) are now TOGETHER .. and when ALL THREE are TOGETHER, the task (of World Transformation) would be completed very quickly. All of you are ready, are you not? You would not say .. ‘no, no, let us rest a little now, Baba, we will do this a little later’. Give the introduction of the Father all around during this ShivRatri. There is great benefit if even the vision of the Father falls on them. The promise which the Father has made for the end period .. which promise did He make? The part of giving ‘dhristi’ will take place in the whole world .. in the whole world, the vision of the Father will fall on all souls .. and no one will be deprived from receiving His ‘dhristi’ .. so this time has now come close!

OK children?
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प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की वाणी
19.03.2020
(देवकी बहन द्वारा - श्री कृष्ण को जन्म देने वाली भारत-माता – जगदम्बा - ओम राधे, मातेश्वरी, सरस्वती मम्मा की आत्मा)

‘कई बच्चे सोचते हैं कि (ब्रह्मा बाबा का) आवाज़ तो (पहले से, अब) नहीं मिल रहा है?

पहले, बच्चों को कहते हैं - आवाज से कोई लेना-देना नहीं है .. पहले यह संदेश दे रहे हैं। भई, अगर कैसेट है, टेप रिकॉर्ड है .. टेप रिकॉर्ड कैसा है? वह टेप रिकॉर्ड के ऊपर है .. पर कैसेट तो वही बजेंगा। अगर ऐसे सोचेंगे - ‘यह आवाज तो नहीं मिल रहा है’! .. तो यह सबसे बड़ी मूर्खता है। आवाज को नहीं देखो ना! बच्चे आवाज को क्यों देखते हैं? .. बाप को देखो! (हाँ बाबा, आवाज में ही कई लोग फंसे हुए हैं!) अच्छा, देखो .. आवाज में बड़े .. बच्चे फंसे हैं। दूसरी बात है ..
आदि में क्या चला? अब बतावे .. पूरा खोलके रहस्य? आदि में अपन (ब्रह्मा बाबा) ने बड़ी भक्ति की, संस्कृत के श्लोक बड़े पक्के थे, बड़ी भागवत पढ़ी, गीता पढ़ी, गुरु किए, सब किए .. तो अपन का संस्कार कैसा बन गया? .. भक्ति वाला बन गया। अब जब अपना बाबा आएगा .. अपना शिवबाबा आएगा .. तो संस्कार किस का यूज़ करेगा? अपन (ब्रह्मा बाबा) का करेगा। अपन ने जो भक्ति की, जो पूजा की, जो संस्कृत में .. जो शब्द का .. उसी का ही करेगा ना? करेगा ना? उसमें (शिव) बाप ने, शास्त्रों के रहस्य बताएं। शास्त्रों के श्लोक के जो भी रहस्य थे .. उसमें (शिव) बाबा ने बताएं। आदि का (१९६९ तक) पार्ट एक अलग पार्ट चला। ठीक है?

अब आओ मध्य में .. अपन का शरीर छूटा। शोभा बच्ची (गुलज़ार दादी) में आए। अब शोभा बच्ची (गुलज़ार दादी) के संस्कारों के अनुसार बाप बोलेंगा! है तो बाप ना .. बाप है! उनका रिकॉर्ड, वह टेप रिकॉर्ड चेंज हो गया। अब उसमें आया - तो कैसा बजेगा? ऐसा ही बजेगा। अब कहते हैं .. अपन तो शरीर पुरुष का, (शिव) बाप भी परमपुरुष। पुरूष और परमपुरुष दोनों मिल गए .. तो ज्यादा बदलाव आवाज़ में नहीं आएगा। लेकिन जब टेप रिकॉर्ड आया .. शोभा बच्ची (गुलज़ार दादी) का .. तो उनका जो शरीर था .. वह कैसा था? (फीमेल) .. पुरुष और फीमेल दोनों मिल गए .. तो तीसरा आवाज निकला .. वह जो परमपुरुष का आवाज निकला .. है ना? जब वह एक आवाज मिल करके .. जो इससे निकलेगा .. तो आवाज तीसरा ही निकलेगा ना? है ना? अपना (शिव) बाबा .. शोभा बच्ची (गुलज़ार दादी) के शरीर का आधार लिया .. बाजा बजाया .. तो फिर कैसा आवाज निकलेगा? तीसरा आवाज निकलेगा। और जबकि उनमें अपन भी .. अपन (ब्रह्मा बाबा) का भी बीच-बीच में पार्ट था।
अब साकार का पार्ट मध्य के पार्ट से मैच (match) नहीं किया .. नहीं किया। एकदम अलग-अलग .. क्यों? कारण क्या बना? मेल और फीमेल का भी कारण बना .. लेकिन संस्कारों का भी कारण बना ना? .. है ना? बाप किस के संस्कारों को यूज करेगा .. थोड़ा-थोड़ा करेगा .. वह तो बाबा परमात्मा है। आत्मा के संस्कारों को मर्ज करके, अपनी पावर को निकालता है। लेकिन जब शरीर के सिस्टम में आता है, तो थोड़ा (यूज) करता है ना? थोड़ा (यूज) करना पड़ता है ना! सिस्टम के हिसाब से चलाना पड़ता है। अब शोभा बच्ची (गुलज़ार दादी) में आया .. शोभा बच्ची ने ज्यादा भागवत .. संस्कार ज्यादा .. ज्यादा भक्ति मार्ग में नहीं गई .. तो उसके अनुसार, सब बच्चों को पालना .. जो बाबा ने पालना दिया .. लेकिन संस्कृत का श्लोक ज्यादा नहीं कहा। लेकिन बाप वही है! बाबा ने उस हिंदी भाषा में .. सबको बड़े प्यार से पालना दिया। ...

अब (अंत का पार्ट) आए इसमें (देवकी बहन में) .. लेकिन अब अपन का भी पार्ट चल रहा है .. अपन का भी बड़ा पार्ट चल रहा है। अभी जब अपन का शरीर छूटा (१९६९ में) .. वतन में गये .. वतन में बिठाके बाबा ने जो सेवा कराया .. जो विस्तार का वृद्धि हुई .. जो बड़ी सेवा .. लेकिन आदि सो अंत का पार्ट किया।
अब अपन आ रहे हैं, तो अपन हिंदी ही (यूज) करेंगे ना! कोई बच्चे कहते हैं .. ‘बाबा, सिंधी बोल के दिखावे .. एक शब्द’। क्यों बोल के दिखावे? प्रूफ चाहिए ना! ‘अगर बाबा सिंधी था, तो सिंधी में एक शब्द बोलके दिखावे!’ आप एक बार (शिव) बाप से परमिशन दे दो .. अपन पूरी सिंधी ही बोलेंगे। लेकिन क्यों नहीं बोलेंगे? क्योंकि आत्मा का जो संस्कार है, आत्मा का जो बाजा है .. वह जो आप ऐसे करेंगे, तो बाजा कौन सा बजेगा? हिंदी वाला बजेगा। अपन इसका संस्कार इस्तेमाल करेंगे .. इनका भाषा बाबा यूज़ करेगा .. तो क्या निकलेगा? हिंदी निकलेगा। सिंधी थोड़े निकलेगा! बच्चे कहते हैं .. ‘सिंधी बोल के दिखावे’ - क्यों बोलके दिखावे? इसमें बाप एक शब्द कहेगा .. बच्चों को अगर संशय है, निश्चय नहीं है .. तो फिर बच्चों का अपना-अपना मर्जी है .. बच्चों का अपना भाग्य है। अपना मर्जी है! बाप कभी-कभी ज्यादा-ज्यादा मेहनत नहीं करेगा। आओ ना .. आओ ना .. नहीं कहेगा! .. क्योंकि वर्तमान समय बच्चों को बाप का जरूरत है .. बाप को भी बच्चों का (जरूरत) है .. है! लेकिन बाप यह नहीं कहेगा .. आओ। ...

आदि, मध्य और अंत का पार्ट .. तीनों .. एक ना मिले दूसरे पार्ट से। बजाता एक ही है .. पर एक ना मिले दूसरे पार्ट से। जैसे एक जन्म ना मिले दूसरे जन्म से .. ऐसे एक पार्ट ना मिले दूसरे पार्ट से। अब कोई-कोई बच्चा कहता है – ‘बाबा, पहले जैसे बोलके दिखाओ’। क्यों? भई, (शिव) बाबा ने अब बाजा ऐसा दिया है .. तो अपन पहले जैसे कैसे बोलेंगे? अब उनको कहेंगे - पहले जैसा शरीर बनाके दे दो .. अपन उस में जाकर के ऐसे बोल देंगे। हां भई, अगर बच्चे कहते हैं, ‘पहले जैसे बोल कर दिखाओ’ .. अपन भी कहते हैं .. पहले जैसा शरीर दे दो .. ऐसे बोलेंगे। भई, अपन का थोड़ी गलती है .. पहला जैसा शरीर है ही नहीं .. और जो बाजा मिला है, उससे ऐसे ही बजाना पड़ेगा। है ना? (बाबा, जो कहते हैं ‘अहो प्रभु - तेरी लीला अपरमअपार है - तेरी गत-मत तू ही जाने’ - अब यह वही समय आ गया) .. यह वही समय है .. यह वही समय है .. फिर बाद में कहेंगे - ‘अहो प्रभु - तेरी लीला .. अपरमअपार! यह भी रोल था ड्रामा में .. हमें पता ही नहीं पड़ा’!

ठीक है, बच्चों!
Zorba the Greek
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Versions of PrajaPita Brahma
19.03.2020
(through Sister Devki – ‘Jagadamba’ - ‘Bharat Mata’ - who gives birth to Shri Krishnasoul of Om Radhe, ‘Mateshwari’, Saraswati Mama)

‘Some children think that the (sound of Brahma Baba’s) voice is not matching (now - as compared to before)’?

First, tell those children – that this has nothing to do with the (sound of the) voice .. first, I am giving them this message. If there is a cassette, or tape-recorder .. how is the tape-recorder? .. That depends on the tape-recorder .. but the same cassette will play. If they think – ‘this (sound of the) voice is not matching’ .. then that is great foolishness. Do not consider the (sound of the) voice. Why do the children consider the (sound of the) voice? .. See the Father! [Yes Baba, many people are confused with the voice!] OK, you see .. many children are very much confused with the (sound of the) voice. Another aspect is ..
What took place in the beginning? Now, shall I .. reveal the complete mystery? In the beginning I performed great Devotion, Verses in Sanskrit were very well known, I had read the Bhagwat and Gita a great deal, I had many gurus, I did all of that .. so, how were my (Brahma Baba’s) sanskars? .. they were those of Devotion. So when our Baba comes .. when our ShivBaba comes .. whose sanskars would He use? He would use my sanskars. Whatever Devotion and worship I performed, whatever words of Sanskrit I remembered .. He would use them, would He not? Would He not? From that, the Father (Shiva) related the essence of the Scriptures. (Shiv) Baba related .. whatever mysteries there were in the verses of the Scriptures. The part of the beginning (UNTIL 1969) was a separate part. OK?

Now come in the middle period .. I left my body (in 1969). We came in Child Shobha (Dadi Gulzar). Now, the Father would speak according to the sanskars of Child Shobha (Dadi Gulzar)! His is the Father, is He not .. He is the Father! His recorder, the tape-recorder changed. So when He comes in her – how would He sound? He would sound like that. Now I say .. I had the body of a male, and the Father (Shiva) is also a Supreme Masculine personality. When a male and Supreme Masculine personality come together .. there would not be much change in the (sound of the) voice. But when the tape-recorder of Child Shobha (Dadi Gulzar) was used .. how was her body? [Female] .. Male and female came together .. so a third (sound of the) voice emerged .. the voice which emerged from the Supreme Masculine personality (of ShivBaba) .. is it not? When (the sound of) that voice comes together .. the (sound of the) voice which emerges from her .. would be a third voice, is it not? Is it not? Our (Shiv) Baba .. took the support of the body of Child Shobha (Gulzar Dadi) .. He played that instrument .. so what (sound of the) voice would emerge? A third (sound of the) voice would emerge. And then I too .. I too had a part through her, in between.
The ‘Sakar’ part (up to 1969) did not match the middle part (after 1969) .. it did not. It was completely different .. why? What was the reason? One reason is because of male and female (personalities coming together) .. but another reason is also due to sanskars .. is it not? Whose sanskars would the Father use .. He would use a little .. Baba is the Supreme Soul. He would merge the sanskars of the soul, and use His own Power. But when He comes in the system of the body, He has to use a little, is it not? He has to use to some extent! He has to conduct Himself according to the system. He came into the body of Child Shobha (Dadi Gulzar) .. Child Shobha did not have sanskars of reading Bhagwat .. she did not go on the path of devotion too much .. so, according to that, all the children received sustenance .. which Baba gave .. but He did not speak many Sanskrit Verses. But the Father is the SAME! Baba gave sustenance to everyone with great Love in that Hindi language ...

NOW, (in His FINAL part) He came in this one (Sister Devki – Saraswati Mama’s soul) .. but NOW even my (Brahma Baba’s) part is going on .. even my big part is taking place. When I left my body (in 1969) .. and went to the Subtle Region .. (Shiv) Baba made me sit in the Subtle Region and do Service .. the expansion of Service increased .. great Service .. He performed the part of the beginning also at the end. Now, when I am coming, I would use only Hindi, is it not? Some children say .. ‘Baba, speak a word in Sindhi and show’. Why should I speak and show? They need proof! ‘If (Brahma) Baba was a Sindhi, then he should speak one word in Sindhi and show!’ You give me permission from Father (Shiva) for one time .. then I would speak only in Sindhi. But why would I NOT speak? Because of the sanskars of the soul .. the instrument of the soul .. when you play it, then which sound would emerge? Hindi language would emerge. When I use the sanskars of this one (Sister Devki) .. Baba would use the language of this one .. so what would emerge? Hindi language would emerge. Sindhi language would NOT emerge! Children say .. ‘show by speaking Sindhi’ – why to speak and show? In this, Baba would say these words .. if the children have doubt, if they DO NOT have faith .. then that is the wish of the children .. the children have their own fortune .. they have their own choice! Sometimes, the Father will not make too much effort (in this). He would not say .. come on .. come on! .. because the children need the Father at the present time .. EVEN the Father needs the children .. He does! But the Father will not say .. come on (in this). ...

The parts of the beginning, middle, and the end .. all three .. one will NOT be the same as the other. The One who plays is the SAME One .. but one part will NOT be the same as the other. Just as one birth will not be the same as another .. in the same way, one part will not be the same as another part. Now, some children say – ‘Baba, speak in the SAME way as before (1969), and show’. Why? (Shiv) Baba has NOW given this instrument .. so how would I speak like before? I would tell them – make a body like before and give me .. I will go in that and speak like that. Yes, if the children say, ‘speak like before, and show’ .. I, too would say .. give me a body like before .. and I would speak like that. It is not my fault .. that I do not have a body like before .. and the instrument which I have received (NOW) .. I will have to play it accordingly. Is it not? [Baba, what they say, ‘Oh God – Your Play is LIMITLESS – ONLY You know your ways and means’ – now the same time has come] .. This is that SAME time .. this is that SAME time .. then LATER, they would say – ‘Oh God – Your Play .. is LIMITLESS! EVEN this role was in Drama .. and we did NOT EVEN know about it’!

OK, children?
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प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की वाणी - 12.06.2021

(देवकी बहन द्वारा - श्री कृष्ण को जन्म देने वाली भारत-माता - जगदम्बा)

Versions of PrajaPita Brahma - 12.06.2021

(through Sister Devki - Bharat Mata - JagadAmba - who gives birth to Shri Krishna)

https://youtu.be/JwTj6CfWyu0

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🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ शिवबाबा याद है?

शिवबाबा की वाणी
09-06-2021

[देवकी माता द्वारा - श्री कृष्ण को जन्म देने वाली भारत-माता – जगदम्बा - ओम राधे, मातेश्वरी, सरस्वती मम्मा की आत्मा - जो पहले श्री कृष्ण को जन्म देकर, फिर २-३ साल के बाद अपना जन्म लेती है - और श्री कृष्ण की पालना दूसरे - (यशोदा) माता और पिता द्वारा होता है!]

"मीठे बच्चे .. बाप, बाप बनके सभी को देख रहा है .. क्योंकि अब बच्चों को अगले कल्प में ही देख पाएंगे .. बाप का रोल अब पूरा होने वाला है .. तो बाप सूक्ष्म में हर बच्चे को गले लगाकर, दृष्टि देकर, सभी से विदाई लेंगा .. क्योंकि बाप जब ‘महाकाल’ बनता है, तो सिर्फ ‘महाकाल’ ही होता है!"

Baapdada Milan - 09.06.2021

अच्छा! आज खुशी का दिन है ना? सभी खुशनसीब बाप के प्यारे ते प्यारे बच्चे बाप के सम्मुख बैठे हैं। आज का जो दिन है, आज के दिन की शिक्षा क्या रही? क्या रही – ‘अचानक’! ‘एवरेडी’! .. अचानक .. कुछ भी हो सकता है .. अचानक .. बाप मैसेज देवें। पर समय .. फिर भी देखो समय दिया ना? हर एक बच्चे को समय मिला .. यह प्यार की निशानी है। सभी खुश हो? खुश तो हो, पर खुशी के साथ साथ भाग्यशाली भी हो। कितने भाग्यशाली!

अच्छा! आज तो बाप सभी से मिलन मनाने आए हैं। आज बाप अपने बच्चों को प्यार करने आए हैं। प्यार का सागर क्या लेके आया है? प्यार की गंगा लेके आया है .. जिस प्रेम की गंगा में सभी बच्चे डुबकी मार रहे हैं। अगर बाप बच्चों से पूछे – बच्चे सबसे ज्यादा प्यार किससे करते हैं? पहली पहली बारी तो देहधारी को ढूँढेंगे .. कौन है जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, कौन है? .. कहते हैं, ‘बाबा, प्यार तो हम आपसे ही करते हैं - पर आपके बाद फिर हम इनसे भी प्यार करते हैं - हमारा इनसे भी रिश्ता है’। .. बच्चे किस से, कितना करते हैं .. यह नहीं पूछते .. पर प्यार ज्यादा किस से करते हैं?

आज तो सभी बिंदु बनके बैठे हैं। बिंदु माना क्या? ‘बिंदु’ – ‘बिंदी’! आत्मा बिंदी, आत्मा का पिता बिंदी, और यह जो विश्व है यह भी क्या है .. बिंदी है ना। तो फिर क्यों .. क्यों इतना लंबा सोचना? कहाँ-कहाँ बच्चे बैठ के क्या सोच रहे हैं - ‘बाबा, हम आवे?’ बाप क्या कहेंगा? आप शरीर से आते हैं .. पर बाप रोज आते हैं। मिलन मनाने का ही लगन है! पर बाप जो कहते हैं – बच्चे, बाप को कितना याद करते हैं? कितना याद करते हैं? आने की खुशी है .. पर चार्ट की जब बात पूछते हैं .. कई-कई बच्चे तो बाप को चलाते हैं! कहते हैं – ‘बाबा, हम आपको बहुत याद करते हैं’। बाप क्या कहता है? जितना आप याद करते हैं, बाप भी उतना ही याद करतें हैं। समय कम है .. कई बच्चे कहते हैं, ‘हमारा पुरुषार्थ तो आपके साथ रहने से ही बढ़ेंगा’। मेजारिटी बच्चों का यह सवाल आ रहा है। क्या कहते हैं – ‘बाबा, हमारा पुरुषार्थ आपके साथ रहने से बढ़ेगा, क्योंकि मदद मिलेंगा’। बाप क्या कहते हैं? क्या कहते हैं? ज्यादा याद किसको आती है? किसको आती है? .. जो दूर बैठते हैं। ज्यादा प्यार किसको? जो दूर बैठ कर बाप को याद करते हैं .. जो दूर बैठके बाप की याद में आँसू बहाते हैं। जैसे बाप हर एक बच्चे को याद करता है ना। बाप, बाप बनके सभी को देख रहा है। कहाँ भी बैठे हैं .. देख रहा है ना .. क्यों देख रहा है? क्योंकि बाप अब जानता है कि इन बच्चों को अगले कल्प में ही देख पाएंगे। .. क्योंकि बाप का रोल पूरा होने वाला है .. तो बाप सूक्ष्म में हर बच्चे को गले लगाकर, दृष्टि देकर, सभी से विदाई लेंगा। क्योंकि बाप जब ‘महाकाल’ बनता है, तो सिर्फ ‘महाकाल’ ही होता है। .. तो बाप के आप सभी बच्चे हैं। बच्चों के मन में संकल्प चल रहा है - क्या ‘बाबा, कितना समय पार्ट चलेगा?’ बाप क्या कहेंगा - ज्यादा समय नहीं रहेंगा .. क्योंकि साकार में सभी ने झोली भर लिया ना। हाँ, सारे विश्व पर बाप का दृष्टि तो पड़ेंगा ही .. पर उसी बीच में, बाप अपना (‘महाकाल’ का) कर्तव्य शुरू कर देंगा। पर फिर जब एक बारी ‘महाकाल’ का रूप आ गया, तो बच्चों को बाप दिखाई नहीं देंगा। आज जो कहाँ-कहाँ बैठकर .. अभी भी क्या कहते हैं – ‘नहीं-नहीं, बाबा नहीं .. नहीं आ सकते!’ जैसे वर्तमान में बच्चे ऐसे कहते हैं .. तो उनके लिए बाप क्या कहेंगा? ‘महाकाल’ बनके कहेंगा - हाँ आप सत्य हो .. क्योंकि अब बाप है ही नहीं!

समय कम है, गफलत नहीं करें। अगर बच्चों को बाप कहते हैं - समय कम है, गफलत नहीं करें, तो सबसे पहले बच्चे अपना लौकिक कारोबार छोड़ने की बात करते हैं। .. वो तो जब बाप को छुड़ाना होंगा, छुड़ा देंगा .. और छूट भी गया है। क्या लौकिक कारोबार छोड़के, बापके पास बैठकर कितना सेवा करेंगे? कितना करेंगे? बस, बैठे-बैठे बातें करने से कुछ नहीं होता है। बैठकर ज्ञान की चर्चा करने से कुछ नहीं होता है .. सेवा करने से होता है। कोई तो देह-अभिमान के ऐसे शिकार हैं कि अपना सेवा भी खुद नहीं करते। चलो बाबा के घर में .. खाने को मिल रहा है .. बस, बैठो एक-दो से बात करो... क्या यह पुरुषार्थ होंगा .. जो आने के लिए कहते हैं? अगर बाप के घर में आएंगे .. आना चाहते हैं .. तो जो बाप का फरमान होंगा .. जो निमित्त द्वारा .. बाप निमित्त को जो फरमान देंगे .. उसको ‘जी, हाँ जी’ करना है। बाप ने सबको बुलाया, सबका सेवा भी देखा .. पर बच्चे कैसे करते हैं? बाप के घर में आए हैं, तो भाग्य जमा करें, घूमने फिरने नहीं आते ना? अब जो भी आवे तो लक्ष्य रखके आवे कि कोई भी सेवा मिले – ‘जी’! .. ‘मुझे यह नहीं आता’ .. यह बाप नहीं सुनेंगा। जितना सेवा .. सेवा भल कोई भी होती है - वाणी की सेवा, कर्मणा से की गई सेवा, मनसा सेवा। हर किसी को बाप यह कह रहे हैं .. चाहे यहाँ बैठे हैं, चाहे बाहर बैठे हैं, चाहे कोई आने वाले हैं, या फिर जो सोचते हैं कि हम बाप के साथ रहके पुरुषार्थ करेंगे - कोई भी बच्चा यह नहीं कहेंगा कि ‘यह मैं नहीं कर सकता’ या ‘यह मुझे नहीं आएँगा’। सबसे विशेष बात, जो बाहर बैठकर इधर-उधर की बातों में अपना समय व्यर्थ गँवा रहें हैं, उन बच्चों को विशेष अटेंशन! बातें कम करें, सेवा ज्यादा करें .. समय कम है, व्यर्थ नहीं गँवाना है।

आज तो बाप मिलन मनाने आएँ हैं, हर उन बच्चों के लिए जो बाप से मिलने के लिए तरस रहे हैं। ‘बाबा, हम आवें?’ बाप केहते हैं, अभी बाप का बुलावा आएँगा तो भल (आएं)। पर जहाँ है, वहाँ पर सेवा करके .. मनसा, वाचा, कर्मणा .. सेवा करके बाप को अपना चार्ट भेजें। जो अपने लौकिक घर में आर्डर करते हैं .. बाप देखतें हैं – ‘ऐसे करो, यह करो, यह नहीं किया’ .. उन बच्चों को विशेष - ऑर्डर नहीं .. बिल्कुल ऑर्डर नहीं .. जो बाहर बैठकर .. क्यों आर्डर किसको कर रहे हैं? पहले लौकिक घर में देह अभिमान तोड़े, फिर पारलौकिक बाप सभी को निमंत्रण देंगा। क्योंकि पारलौकिक बाप के घर में कोई किसपे आर्डर नहीं चलाएँगा, आकर कोई आर्डर नहीं चलाएँगा। पहले, जहाँ बैठे हैं अपने लौकिक घर में .. जो आर्डर करते हैं – ‘ऐसे करना है’ .. वहाँ पहले देह अभिमान को खत्म करें .. ठीक है?

अच्छा - ऐसे याद में झूमने वाले बच्चों को, ज्ञान की डाँस करने वाले बच्चों को, ऐसे हर घड़ी एवरेडी रेहने वाले बच्चों को, बापदादा का मीठा-मीठा याद प्यार।

खुश रहो .. खुश रखो .. मन स्वस्थ होंगा तो सब स्वस्थ होंगा। इस संसार में सच्चा रिश्ता बाप और बच्चे का, आत्मा और परमात्मा का है, बाकी रिश्ते तो छोड़के जाने वाले हैं। जिससे प्यार करते हैं ना, उस पर नशा होता है, खुशी होती है कि वाह! मैं ने अपने साथी को चुनने में कोई गफलत नहीं किया। संतुष्टि होनी चाहिए .. ‘मैं ने ऐसे साथी को चुना है, जो शरीर में रहते भी मेरे साथ है, और शरीर के छोड़ने के बाद भी मेरे साथ है’ .. यह नशा होना चाहिए, यह खुशी होनी चाहिए। जैसे, बच्चे का अधिकार है, बाप पर .. है ना? तो अधिकारी कभी दुखी नहीं होता, रोता नहीं .. बेफिक्र होता है, मेरा बाप बैठा है ना .. मुझे संभाल लेंगा। ठीक है .. खुश हो ना? .. संतुष्ट हो? अपने आपसे, अपने साथी से .. खुश हो? एवरेडी हो ना? थोड़ा भी लेट नहीं, बाप कहे – ‘चलो, चलें’। बच्चे कहे – ‘जी बाबा’। यह नहीं कहें – ‘यह भी उठा लूँ, वो भी उठा लूँ, यह तो ले लूँ बाबा .. यह तो काम आएँगा’। क्या कहेंगे? ‘जी बाबा’।

अच्छा, सभी को जहाँ भी बैठे हैं, सभी बच्चे टोली खावे, बाप सबको टोली खिला रहें हैं। यह .. सभी को।

(फिर बाबा ने सभा में बैठे सभी बच्चों को एक-एक कर टोली खिलाई ... उसके बाद हुई व्यक्तिगत मुलाकात ...)

https://www.youtube.com/watch?v=RDJxqSys5-4
Zorba the Greek
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Versions of Shiv Baba
09.06.2021

[through Sister Devki – ‘Jagadamba’ - ‘Bharat Mata’ - who gives birth to Shri Krishnasoul of Om Radhe, ‘Mateshwari’, Saraswati Mama (who had taken another birth in an affluent family, between 1965 and the present birth) – who first gives birth to Shri Krishna, and then takes her own birth after 2 to 3 years - and the sustenance of Shri Krishan takes place through another – (Yashoda) mother and Father]

"Sweet children ... The Father is watching everyone - as a Father .. because He will be able to see these children only in the next Cycle .. because the Father's role is now going to be completed .. so the Father will give ‘dhristi’, and embrace every child in the subtle form, and then bid ‘farewell’. Because when the Father becomes ‘Mahakal’ (the Great Death), then there will be ONLY ‘Mahakal’!"

Baapdada Milan - 09.06.2021

OK .. Today is the day of Happiness, is it not? .. Today all the Loving, fortunate children are sitting in front of the Father. What is the lesson of today? .. ‘SUDDEN’! .. ‘EVER READY! .. Anything can happen SUDDENLY .. the Father can give a message SUDDENLY .. but still He has given time today. This is the sign of Love - that every child has got time today. Are you all happy? You are happy. Along with that you are fortunate also. How fortunate!

OK .. Today, the Father has come to celebrate a meeting with everyone. Today the Father has come to Love His children. What has the Ocean of Love brought? He has brought the Ganges of Love .. in which all the children are taking a dip. If the Father asks the children – whom do you children love the most? In the first instance, they will think of a human being whom they love the most. And when asked as to who that is? Then they say that – ‘Baba, we Love only you .. but after you, we love them too .. we also have a relationship with him/her.’ .. Baba is not asking whom all you love, and how much .. but whom do you Love the most?

Today, everyone is sitting in remembrance by being a Point. What does a Point mean? ‘Point’ – ‘Dot! The soul is a Dot, the Father of the soul is also a DOT; and what is this world - even this is a dot. Then why do you think about it for so long? Children who are sitting far away, are thinking – ‘Baba, can we come (to meet)?’ What will the Father say - you come with the body .. but the Father comes every day .. He is eager to celebrate a meeting! But what the Father asks is - how much do children remember the Father? How much do you remember? There is Happiness for you to come .. but when you are asked about your Chart .. many children just avoid! They say – ‘Baba, we Remember you a lot.’ What does the Father say? Father says He too remembers you only to the extent you Remember Him. Time is short .. many children say that ‘our effort will increase only by being with you’. This question is coming from the majority children. They say – ‘Baba, our effort will increase only by being with you, because we will receive help.’ What does the Father say? Father says - those who sit far away remember the most.
Who loves more? Those who sit far away, they remember a lot .. and those who shed tears in remembrance of the Father, sitting far away. The Father remembers each and every child. The Father is watching everyone wherever they are sitting - as a Father. He is watching everyone wherever they are sitting, because the Father now knows that He will be able to see these children only in the next Cycle .. because the Father's role is now going to be completed .. so the Father will give ‘dhristi’, and embrace every child in the subtle form, and then bid ‘farewell’. Because when the Father becomes ‘Mahakal’ (the Great Death), then there will be ONLY ‘Mahakal’. ..
So, you are the Father's Children. The children are thinking – ‘Baba, for how long will this part (role) last?’ What will the Father say? .. it will not last long .. because everyone has filled their aprons in the corporeal (part). Yes, the Father's vision will definitely fall on the whole world .. but, in the meantime, the Father will start his duty (as the ‘Great Death’). But then, when the Father takes the form of the ‘Great Death’ (‘Mahakal’), the children will not be able to see the Father (as the Father). Today, wherever they are sitting they still say – ‘no, no, Baba cannot come like this!’ Just as the children at present say this .. so what will the Father say to them? As ‘Mahakal’, He will say - yes, you are right .. because now there is no Father!

Time is short, do not make a mistake. When the Father says this to the children – time is short, do not make a mistake - then first of all, the children talk about giving up their worldly business (or job) .. when the Father has to free you from that, He will do so .. and some have been freed also. How much Service would you be able to do by just sitting with the Father? How much will you do? Nothing happens by just sitting and talking. Nothing happens by just sitting and ONLY discussing about Knowledge .. it will happen only by doing Service. Some are such victims of body-consciousness that they do not even do their own service themselves. Some are just sitting and talking to each other - since they are getting food to eat in Baba's house. Is this your effort .. that you request to come (to meet)? If you want to come to the Father's house, then whatever will be the Father's order, given through the instrument .. and whatever order is given through the instrument - you have to say, ‘Yes’.
The Father called everyone and saw everyone's Service .. but how do the children do it? If you have come to the Father's house, then accumulate your fortune .. you do not come to roam around, do you? Now whoever comes, they should come with the aim that whatever Service they receive – they will say, ‘Yes’. Father does not want to listen to anyone who says – ‘I do not know’. No matter whatever Service, and how much Service it is - whether it is Service through speech, Service done through actions, or if it is Service through the mind - the Father is saying this to everyone .. whether they are sitting here, or far away.. whether they are going to come, or those who think that they will make effort by staying with the Father .. no child should say that ‘I cannot do this’, or ‘I will not able to do this’.
The most important thing .. special caution to those children who are sitting outside and wasting their time by talking to each other (gossiping). Talk less, do more Service .. time is short, do not waste your time.

Today, the Father has come to celebrate the meeting .. for the sake of every child who has been craving to meet the Father. Children ask Father – ‘shall we come?’ The Father says .. you may come when the Father calls. But wherever you are, send your Chart to the Father by doing Service with thoughts, words and deeds.
The Father sees those who give orders in their worldly house – ‘do this way, do this, this is not done’ .. special caution to those children .. do not order around .. no ordering at all .. those who are sitting outside .. why are you ordering, and to whom? First, break your arrogance of the body in the worldly house, and then the Father will invite everyone. Because no one will give orders in the Father's house, and no one will come and give orders here. First, wherever you are sitting in your worldly house .. those who order – ‘do it this way’ .. first remove the arrogance of the body there .. OK?

OK .. to the children who rejoice in such remembrance, to the children who dance in Knowledge, to the children who are ever ready at every moment, to such children sweet Love and Remembrance of the Father.

Be happy .. make everyone happy .. if the mind is healthy, then EVERYTHING will be healthy. The TRUE relationship in this world is ONLY that of the ‘Father and child’, of the ‘soul and the Supreme Soul’ - the rest of the relations will leave you and go away.
There is intoxication of the one whom you Love, there is Happiness that I did not make a mistake in choosing my partner. There should be satisfaction .. ‘I have chosen such a Companion who is with me even while I am in the body, and who will be with me even after I leave this body’ .. you should have this intoxication, and this Happiness. Just like a child who has a right to the Father .. is it not? So the one who has a right never becomes sad .. he/she does not cry .. he/she is CAREFREE .. thinking ‘My Father is there .. He will take care of me’. OK? .. are you Happy? .. are you satisfied .. are you satisfied with yourself, and with your Companion? .. are you ever ready? Do not be late at all .. when The Father says - come on, let’s go - then children should say – ‘yes Baba’. They should not say – ‘let me take this too, let me take that too; let me take this also Baba .. this will be useful’. What should you say? ‘Yes, Baba’.

OK .. wherever everyone is sitting, all the children should eat toli, the Father is feeding everyone toli .. This .. to everyone.

(Then Baba gave toli individually to all the children sitting in the gathering ... which was followed by personal meeting ...)
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प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की वाणी - 24.06.2021

(देवकी बहन द्वारा - श्री कृष्ण को जन्म देने वाली भारत-माता - जगदम्बा)

Versions of PrajaPita Brahma - 24.06.2021

(through Sister Devki - Bharat Mata - JagadAmba - who gives birth to Shri Krishna)

https://youtu.be/52Vfc2H-KhU

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प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की वाणी
03.03.2020

(देवकी बहन द्वारा - श्री कृष्ण को जन्म देने वाली - भारत-माता, जगदम्बा - ओम राधे, मातेश्वरी, सरस्वती मम्मा की आत्मा)

*(81) ‘जब दादी के तन में .. शोभा बच्ची (गुलजार दादी) के तन में आते थे, तो बाप-दादा .. दोनों साथ में आते थे .. अभी अलग-अलग क्यों आते हैं?’*

देखो बच्चे, जब (शिव) बाप परमधाम से आते हैं .. तो (पहले) सूक्ष्मवतन में आते हैं, सूक्ष्मवतन से (शिव) बाबा फिर स्थूल दुनिया में आते हैं। यह (शिव) बाप के ऊपर कायदा और कानून है .. कि बाप बिंदु है, तो उसको लाइट का शरीर लेकर आना पड़ेगा .. सिर्फ (शिव) बाप के लिए है .. अपन (ब्रह्मा बाबा) के लिए नहीं है .. समझ रहे हो? यह बाप के लिए कायदा कानून क्यों है? क्योंकि निराकार है। उसको ना स्थूल देह है, ना सूक्ष्म देह है .. कुछ नहीं है .. तो वह आते हैं। *तो ऊपर से .. अपन के साथ में आते हैं (बाप-दादा) .. पर जब अपन आते हैं .. अपन के लिए (शिव) बाबा ने यह कायदा नहीं बनाया है कि .. ‘मैं भी साथ में चलूंगा’ .. जहां भी (मैं) जाऊंगा। बाबा ने अपने (खुद के) लिए बनाया है। पर जब बाबा और अपन (बाप-दादा), दोनों आते हैं .. तो बोलते सिर्फ शिवबाबा है .. आते दोनों है .. अपन दोनों आते हैं।* अपन को पता पड़ता है ना क्या-क्या बातें हुई .. पूछो कल क्या हुआ? लेकिन *अपन के लिए कोई कायदा नहीं बनाया है .. कि अपन अकेले कहीं नहीं जा सकते।* समझ रहे हो? सिर्फ बाप के लिए .. यह बाबा ने अपने (खुद के) लिए कायदा बनाया .. और जरूरी क्यों? क्योंकि जब बाबा आते हैं तो पहले .. आपको पता है .. इस संसार को बनाने से पहले, बाबा किसको बनाता है? सूक्ष्म वतन को बनाता है .. और उसमें तीन शरीर लाइट के (ब्रह्मा, विष्णु, शंकर) बनते ही हैं; और आपको यह भी बता दे .. कि *तीनों को अपना शिव बाप ही यूज करता है* .. कैसे?
देखो, पहले अपन (ब्रह्मा) के तन में आते हैं। अपन का भी यह नहीं सोचना कि एक ही शरीर है। सूक्ष्म शरीर पहले है .. बाद में अपन आये हैं। जैसे अपन का शरीर है .. ऐसे ही विष्णु का भी रूप उधर है .. जो सतयुग में आएगा। और जब (शिव बाप) शंकर का लेते हैं .. तो क्या होता है, पता है .. पूरी मशीनरी चलती है! मशीनरी मतलब? जिसको ‘महाकाल’ कहते हैं। बहुत रहस्य हैं .. खुलते जाएंगे .. खुलते जाएंगे .. देखते जाना .. बड़ा मजा आएगा .. बड़ा मजा आएगा! *तीनों (ब्रह्मा, विष्णु, शंकर) के द्वारा ही (शिव) बाप कर्तव्य करते हैं - और वह अपना परमात्मा है .. वह शिव, हर एक आत्मा का पिता है।*
देखो .. यह नियम अपने बाप के लिए है .. शिव बाप के लिए .. क्यूंकि वह क्या है .. निराकार है। ना वह साकार है, ना वह आकार है .. वह क्या है? वह निराकार है। तो निराकार कैसे आएगा? पहले आकार लेगा .. फिर यह साकार लेगा। और अपन तो दोनों बनते हैं .. साकार भी बनते हैं, तो आकार भी बनते हैं .. निराकार तो परमधाम में जाकर बनेंगे .. तो अपन के लिए नियम लागू नहीं है। *अपन (ब्रह्मा बाप) आ सकते हैं .. कभी भी आ सकते हैं .. चलते फिरते कभी भी (अकेले) आ सकते हैं।*

[*जब शिव बाप आते हैं, तो ब्रह्मा बाप का सूक्ष्म शरीर के साथ आना पड़ता है, और देवकी माता के साकार शरीर द्वारा बोलते हैं - तो आवाज अव्यक्त होता है, जैसे दादी गुलज़ार के शरीर द्वारा आवाज होता था - लेकिन यहाँ सिर्फ शिव बाप बोलते हैं, ब्रह्मा बाप बिच में बिलकुल नहीं बोलते हैं - इसलिए इसको ‘शिवबाबा की वाणी’ कहा जाता है!
जब ब्रह्मा बाप आते हैं, वह अकेले आ सकते हैं - शिव बाप को साथ में आना जरूरी नहीं है - तो आवाज दूसरे प्रकार का होता है - इसलिए इसको ‘प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की वाणी’ कहा जाता है!*]


*(82) दूसरा सवाल होता है .. ‘बाबा, आप ऐसे कैसे आ सकते हैं?’*

सबसे पहली बात .. सबसे बड़ा उलझन वाला जो सवाल है .. शकल को देखते हैं .. इसकी (देवकी माता की) शकल में क्यों आया? इसने क्या किया? यह कौन है? कहाँ से आई है? *कोई नहीं जानता .. पर जिसने लिया है, वह जानता है ना?* आप बच्चों के 84 जन्म थे .. आप तो नहीं जानते थे! आप तो 84 लाख जानते थे .. भक्ति मार्ग में .. 84 किसने बताया? बाबा ने बताया .. तभी तो जाना। भक्ति मार्ग में अनेकों को भगवान मानते थे। भगवान एक है .. यह किसने ज्ञान दिया? बाबा ने। अपन (ब्रह्मा बाबा) के पास था? अपन भी गीता पढ़ते थे .. पढ़ते थे .. वहीं चलते थे। यह सारा ज्ञान किसने दिया? ज्ञानी किसने बनाया? ज्ञान सागर ने बनाया। *तो फिर क्या हम बच्चों को (शिव) बाप से भी ज्यादा ज्ञान हो सकता है?* अगर हो सकता है तो आज बतावे। जितना आप स्टॉक करेंगे ना, वह चार गुना ऊपर चढ़ाके आपको देगा। *वह सागर है .. और सागर से एक बाल्टी अगर किसी को मिल गई, और अपने आप को सागर समझे, तो उसकी गलती कहेंगे!* सागर है .. और सागर कभी अपनी चाबी देता नहीं है। खजाना है वह!

ठीक है, बच्चों?
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