SM & AV points for churning – Revised in 2021

To discuss the BK and PBK versions relating to the progressive differential development of BK & PBK ideologies or theologies.
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Adam
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Sakar Murli Points, Revised on 28.09.2021 (Previous Revision on 15.09.2016)

यह कोई समझते नहीं कि हम नर्क में हैं। रावण ने सबकी बुद्धि को एकदम ताला लगा दिया है। सबकी बुद्धि एकदम मारी गई है। *बाप समझाते हैं - भारतवासियों की बुद्धि सबसे विशाल थी। फिर जब बिल्कुल ही पत्थरबुद्धि बन जाते हैं तब ही दु:ख पाते हैं। ड्रामा प्लैन अनुसार बेसमझ बनना ही है।* बेसमझ बनाती है माया। पूज्य को समझदार और पुजारी को बेसमझ कहा जाता है। कहते भी हैं, ‘हम नींच पापी हैं।’ परन्तु समझदार कब थे, यह पता नहीं पड़ता। रावण रूपी माया बिल्कुल ही पत्थर बुद्धि बना देती है। अभी तुमको समझ आई है कि हम ही पूज्य थे, फिर पुजारी बनें।
“No one believes that they are in Hell. Ravan has completely locked everyone's intellect. Everyone's intellect is completely ‘dead’ (like a stone). *The Father explains - the people of Bharat had the most unlimited intellects. It is when their intellects become completely like stone that they experience sorrow. According to Drama plan, everyone has to become senseless.* It is Maya that makes you senseless. Those who are worthy-of-worship are said to be sensible; whereas, worshipers are said to be senseless. They say, ‘we are degraded sinners.’ However, they do not know when they were sensible. Maya, Ravan turns your intellects completely to stone. You now understand you were worthy-of-worship, and that you have now become worshipers.”


खास भारतवासी जब उल्टे बन जाते हैं, तब बेहद बाप को ही कुत्ते-बिल्ली, पत्थर-ठिक्कर में ले जाते हैं। वन्डर है ना। अपने से भी मुझे नीचे ले जाते हैं। *यह भी ड्रामा बना हुआ है। किसका दोष नहीं है, सब ड्रामा के वश हैं। ईश्वर के वश नहीं। ईश्वर से भी ड्रामा तीखा है। बाप कहते हैं - मैं भी ड्रामा अनुसार अपने समय पर आऊंगा।*
“It is especially when the (intellects of the) people of Bharat become completely inverted (like stone) that they put the Unlimited Father into cats and dogs, pebbles and stones! It is a wonder! They have degraded Me even more than themselves. *This Drama is preordained. It is not anyone's fault, because everyone is controlled by Drama - not by God. The Drama is even more powerful than God. The Father says - I too will come at My time, ACCORDING to Drama.* ”


भगवान ने तो आकर ब्रह्मा द्वारा वेदों, शास्त्रों का सार समझाया है। उन्होंने शास्त्र दे दिये हैं ब्रह्मा को। अब भगवान कहाँ? ऐसे तो नहीं विष्णु की नाभी से ब्रह्मा निकला, तो विष्णु ने बैठ शास्त्रों का सार बताया! नहीं! ब्रह्मा द्वारा समझाया है। *त्रिमूर्ति के ऊपर है शिवबाबा, वह बैठ सार बताते हैं - ब्रह्मा द्वारा। जिनके द्वारा समझाते हैं वही फिर पालना करेंगे।* तुम हो ब्रह्माकुमार कुमारियां। ब्राह्मण वर्ण है ऊंच ते ऊंच। तुम अभी हो ईश्वरीय सन्तान। ईश्वर के रचे हुए यज्ञ की तुम सम्भाल करते हो।
“God came and explained the essence of the Vedas and Scriptures through Brahma. They have then portrayed Brahma with the Scriptures. So, what about God? It is not that Brahma emerged from the navel of Vishnu, or that Vishnu gave the essence of the Scriptures! No! God explained through Brahma. *Above the Trimurti is Shiv Baba; He speaks the ESSENCE through Brahma. The one (Brahma Baba), through whom He (Shiva) explains, will then carry out the sustenance (as ‘Vishnu’, in Golden Age - practically).* You are Brahma Kumars and Kumaris. The Brahmin clan is the highest-on-high. You are now Godly children. You are looking after the sacrificial Fire created by God.”


*बाप आते हैं अमरलोक स्थापन करने।* एक पार्वती को कथा सुनाने से क्या होगा? अमरनाथ शंकर को कहते हैं, उनको पार्वती देते हैं। अब शंकर-पार्वती स्थूल में आ कैसे सकते - जबकि उन्हों को सूक्ष्मवतन में दिखाया है? अभी तुमको समझाया है - जगत अम्बा, जगत पिता लक्ष्मी-नारायण बनते हैं। लक्ष्मी-नारायण फिर 84 जन्मों के बाद, जगत अम्बा, जगतपिता बनते हैं। वास्तव में जगत अम्बा है पुरुषार्थी, फिर लक्ष्मी है पावन प्रालब्ध। महिमा जास्ती किसकी है?
“ *The Father comes to establish the ‘Land of Immortality’ (‘Amarlok’ - RamRajya).* What would happen by only one Parvati being told the Story (of Immortality)? They call Shankar the ‘Lord of Immortality’ (‘Amarnath’), and they show Parvati with him. Since Shankar-Parvati have been shown in the Subtle Region, how could they exist in corporeal forms? It is now explained to you that JagadAmba (soul of Om Radhe – Saraswati Mama) and JagadPita (soul of Dada Lekhraj – Brahma Baba) become Lakshmi and Narayan. Lakshmi and Narayan then become JagadAmba and JagadPita after 84 births (once again). In fact, JagadAmba is an effort-maker, and Lakshmi is the Pure reward. Whose praise is greater (although they are one and the same soul)?”


जगत अम्बा पर देखो कितना मेला लगता है। ‘काली, कलकत्ते वाली’ मशहूर है। काली माता के पास भला काला पिता क्यों नहीं बनाया है? वास्तव में जगत अम्बा, आदि देवी ज्ञान चिता पर बैठ काले से गोरी बनती है। पहले ज्ञान-ज्ञानेश्वरी है, फिर राज-राजेश्वरी बनती है। *यहाँ तुम आये हो ईश्वर से ज्ञान लेकर राज-राजेश्वरी बनने।* लक्ष्मी-नारायण को राज्य किसने दिया? ईश्वर ने। अमरकथा, सत्य नारायण की कथा बाप ही सुनाते हैं - सेकेण्ड में - जिससे नर से नारायण बनते हैं।
“Look how many gatherings take place for JagadAmba! ‘Kali of Kolkata’ is also very well known. Why have they not created ‘Kala Pita’ (a dark Father - a male figure) with ‘Kali Mata’ (Mother Kali) of Kolkata? In fact, JagadAmba, or Adi Devi, sits on the ‘pyre of Knowledge’ and becomes beautiful from ugly. She first becomes the ‘goddess of Knowledge’ and then becomes the Princess. *You have come here to take Knowledge from God and become Princes and Princesses.* Who gave Lakshmi and Narayan their Kingdom? God! Only the Father tells you the ‘Story of Immortality’ and the ‘Story of the TRUE Narayan’, and you then become (an ELEVATED Deity, like) Narayan from an ordinary man, within a second.”
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Adam
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Sakar Murli Points, Revised on 29.09.2021 (Previous Revision on 16.09.2016)

बच्चे जानते हैं, हम 5 विकारों पर जीत पा रहे हैं। कहा जाता है, ‘माया जीते जगत जीत।’ ‘माया’ 5 विकारों रूपी रावण को कहा जाता है। माया दुश्मन ठहरी। *‘माया’ धन सम्पत्ति को नहीं कहा जाता।* लिखना भी है, ‘5 विकारों रूपी रावण वा माया ..’, तो मनुष्य कुछ अर्थ समझें। नहीं तो समझ नहीं सकते हैं। ‘माया जीते जगत जीत।’ इसमें यादवों और कौरवों, वा असुरों और देवताओं की कोई बात नहीं। स्थूल लड़ाई होती नहीं है। *गाया जाता है, ‘योगबल से माया रावण पर जीत पाने से जगत जीत बनते हैं।’*
“ You children know that you are conquering the five vices. It is said, ‘those who conquer Maya conquer the world.’ The five vices are called ‘Maya’, Ravan. Maya is an enemy. *‘Maya’ is not wealth or prosperity.* You have to write, ‘the five vices are Maya, Ravan ..’, people will then be able to understand the meaning of it. Otherwise, they are unable to understand it. ‘Those who conquer Maya conquer the world.’ Here, there is no question of Yadavas or Kauravas, Deities or Demons. This is not a physical war. *It is remembered that ‘you become the conquerors of the world by conquering Maya, Ravan, with the Power of Yoga’.* ”


बाप कहते हैं – बच्चे, काम महाशत्रु है, इन पर जीत पाकर पवित्र रहना है, इसलिए कमल फूल की निशानी भी दिखाई है। *गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान बनना है। यह दृष्टान्त तुम्हारे लिए है।* हठयोगी (हद के सन्यासी) तो गृहस्थ व्यवहार में कमल फूल समान रह न सकें। वह अपना निवृत्ति मार्ग का पार्ट बजाते हैं। गृहस्थ व्यवहार में रह नहीं सकते, इसलिए घर बार छोड़ चले जाते हैं।
“The Father says - children, lust is the greatest enemy; conquer it and remain Pure. This is why the symbol of a lotus flower is shown. *While living within the house-hold, become as pure as a lotus flower. This example is for you.* ‘Hatha yogis’ (limited sannyasis) cannot remain as pure as a lotus while living within the house-hold. They play their parts on the ‘path of isolation’; they cannot live within a house-hold. Therefore, they renounce their homes and families and go away (to the jungles).”


तुम, दोनों संन्यास (हद व बेहद) की भेंट कर सकते हो। प्रवृत्ति मार्ग में रहने वालों का गायन है। *बाप कहते हैं - गृहस्थ व्यवहार में रहते सिर्फ यह एक अन्तिम जन्म हिम्मत कर कमल फूल समान पवित्र रहो।* भल अपने गृहस्थ व्यवहार में रहो। वह संन्यासी तो घरबार छोड़ जाते हैं। ढेर संन्यासी हैं जिन्हों को भोजन देना पड़ता है। पहले वह भी सतोप्रधान थे, अभी तमोप्रधान बन गये हैं। यह भी ड्रामा में उनका पार्ट है। फिर भी ऐसे ही होगा।
“You can compare the two types of renunciation (limited and unlimited). There is the memorial of those who live within their house-holds (and remain Pure). *The Father says - whilst living within your house-holds, simply have courage and live as pure as a lotus flower, for this last birth.* You may live within your house-holds. Those sannyasis renounce their homes and families. There are many (limited) sannyasis; food has to be provided for them. At first, they too were ‘satopradhan’, but they have now become ‘tamopradhan’. That is also in their parts in this Drama. The same thing will happen again.”


ब्रह्मा और विष्णु का कनेक्शन भी जरूर है। ब्रह्मा सो विष्णु एक सेकेण्ड में। मनुष्य से देवता बनते हैं - सेकेण्ड में जीवनमुक्ति इसको कहा जाता है। बाप के बने, और जीवनमुक्ति का वर्सा पा लिया। जीवनमुक्त तो राजा, प्रजा सब हैं। जो भी आने हैं उनको जीवनमुक्त बनना है। *बाप तो समझाते हैं सबको। फिर है पुरुषार्थ करना, ऊंच पद पाने के लिए। सारा मदार है पुरुषार्थ पर।* क्यों न पुरुषार्थ करते-करते हम ऊंच पद पायें? बाप को बहुत याद करने से बाप की दिल पर अर्थात् तख्त पर चढ़ जायेंगे। बाप कोई मेहनत नहीं देते हैं।
“There is definitely a connection between Brahma and Vishnu. Brahma becomes Vishnu within a second. Human beings change into Deities - and this is known as Liberation-in-Life within a second. As soon as you belong to the Father, you claim the inheritance of Liberation-in-Life. All the Kings and subjects are liberated in life. Anyone who is to go there (to RamRajya) has to become liberated in life. *The Father explains to everyone, and it is then a matter of making efforts to attain a high status. Everything depends on your efforts.* Why should we not continue to make efforts and claim a high status? By remembering the Father a great deal, you will be able sit within His Heart, that is, on the Throne. The Father does not give you a lot of hard work.”
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Sakar Murli Points, Revised on 30.09.2021 (Previous Revision on 17.09.2016)

रामराज्य में है सुख, रावण राज्य में है दु:ख। अब यह कौन बैठ समझाते हैं? पतित-पावन बाप, शिवबाबा; ब्रह्मा दादा। बाबा हमेशा सही करते हैं – ‘बापदादा’। प्रजापिता ब्रह्मा भी तो सबका होगा, जिसको ‘एडम’ कहा जाता है। उनको ‘ग्रेट-ग्रेट ग्रैन्ड फादर’ कहा जाता है। मनुष्य सृष्टि में प्रजापिता हुआ। प्रजा-पिता ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण, फिर ब्राह्मण सो देवी-देवता बनते हैं। देवता, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र बन जाते हैं, *इनको कहा जाता है प्रजापिता ब्रह्मा, मनुष्य सृष्टि का बड़ा।*
“There is Happiness in the ‘Kingdom of RAMA (Shiva)’; and there is sorrow in the ‘kingdom of Ravan’. Who sits and explains all of this? The Purifier Father, Shiv Baba; and Brahma Dada. Baba always signs - ‘BapDada’. PrajaPita Brahma (soul of Dada Lekhraj), who is called ‘Adam’, is the (‘Alokik’) Father of everyone. He is called the ‘great-great-GrandFather’. He is the Father of all Humanity. Brahmins are created through PrajaPita Brahma, and they then become Deities. They become Deities, then ‘kshatriyas’, merchants, and then ‘shudras’. *This one (soul of Dada Lekhraj) is called PrajaPita Brahma, the head of the human world.* ”


प्रजापिता ब्रह्मा के कितने ढेर बच्चे हैं। ‘बाबा, बाबा’ कहते रहते हैं। *यह है साकार बाबा। शिवबाबा है निराकार बाबा। गाया भी जाता है प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नई मनुष्य सृष्टि रचते हैं।* यह है पतित दुनिया रावण राज्य। अब रावण की आसुरी दुनिया खत्म हो जायेगी, उसके लिए यह महाभारत लड़ाई है। ... नई दुनिया में फिर नई खानियां निकलती हैं, जिससे नई दुनिया के महल आदि सारे बनाये जाते हैं। यह पुरानी दुनिया अब खत्म होनी है।
“PrajaPita Brahma has so many children. They continue to call him, ‘Baba, Baba’. *This one is the corporeal (‘Alokik’) Baba. Shiv Baba is the Incorporeal (‘Parlokik’) Baba. It is remembered that the new human world is created through PrajaPita Brahma.* This is the impure world, the ‘kingdom of Ravan’. The devilish world of Ravan is now to be destroyed, and there will be the Mahabharat War for that. ... New mines will emerge in the New World from which all the palaces, etc., of the New World will be built. This old world is now to be destroyed.”


सतयुग में बहुत थोड़े मनुष्य होते हैं। कैपिटल देहली होती है, जहाँ लक्ष्मी-नारायण का राज्य होता है। देहली सतयुग में परिस्तान थी। देहली ही गद्दी थी। रामराज्य में भी देहली ही कैपिटल रहती है। परन्तु रामराज्य में हीरे, जवाहरों के महल थे, अथाह सुख था। *बाप कहते हैं - तुमने विश्व का राज्य गँवाया है, मैं फिर से देता हूँ।*
“There will be very few human beings in the Golden Age. The capital will be Delhi, where there will be the Kingdom of Lakshmi and Narayan. Delhi was ‘Paristhan’ (‘Land of Angels’) in the Golden Age. The Throne (capital) was in Delhi. In the ‘Kingdom of RAMA’, too, Delhi was the capital. However, in the ‘Kingdom of RAMA’ they had palaces studded with diamonds and jewels; there was plenty of Happiness. *The Father says - you lost the Kingdom of the world, and I am giving it back to you, once again.* ”


तुम मेरे गले की माला बन, फिर विष्णु के गले की माला बन जायेंगे। माला में ऊपर हूँ मैं। फिर युगल है ब्रह्मा-सरस्वती। वही सतयुग के महाराजा-महारानी बनते हैं। उन्हों की फिर सारी माला है, जो नम्बरवार गद्दी पर बैठते हैं। *मैं भारत को इन ब्रह्मा-सरस्वती और ब्राह्मणों द्वारा स्वर्ग बनाता हूँ। जो मेहनत करते हैं, उन्हों के फिर यादगार बनते हैं।*
“You will become a garland around My Neck, and then become a garland around the Neck of Vishnu. I am at the top of the Rosary (of Victory), and then there is the couple, Brahma and Saraswati. They, themselves, become the Emperor and Empress of the Golden Age. Then there is their whole Rosary, who sit on the throne, number-wise. *I make Bharat into Heaven through Brahma, Saraswati and the Brahmins. Memorials are created of those who make efforts.* ”


यह ड्रामा बना हुआ है। अभी तुम आत्मायें जानती हो, हमारा (शिव) बाबा, इस अपने शरीर द्वारा यह राज़ समझा रहे हैं। हम आत्मा इस शरीर द्वारा सुनती हैं। आत्म-अभिमानी बनना है। अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो, तो कट निकलती जायेगी, और पवित्र बन तुम बाप के पास आ जायेंगे। जितना याद करेंगे उतना पवित्र बनेंगे, *औरों को भी आप समान बनायेंगे तो बहुतों की आशीर्वाद मिलेगी। ऊंच पद पा लेंगे*, इसलिए गाया जाता है सेकेण्ड में जीवनमुक्ति।
“This Drama is preordained. You souls know that our (Shiv) Baba is now explaining these secrets to us through this body (of Brahma Baba) of His. We souls listen through our bodies. You have to become soul-conscious. Consider yourselves to be souls and Remember the Father, and the rust will continue to be removed and you will become Pure and go to the Father. The more you Remember Him, the purer you will become. *When you make many others equal to yourselves, you will receive blessings from many and claim a high status.* This is why it is remembered that you receive Liberation-in-Life, in a second.”
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Sakar Murli Points, Revised on 01.10.2021 (Previous Revision on 22.10.2016)

अभी बाप स्वयं पावन बनाने आये हैं। राजयोग सिखा रहे हैं। पढ़ाई बिगर कोई ऊंच पद पा नहीं सकते। *तुम जानते हो बाबा हमको पढ़ाकर नर से नारायण बनाते हैं। एम आब्जेक्ट सामने खड़ी है। प्रजा पद कोई एम आब्जेक्ट नहीं है।* चित्र भी लक्ष्मी-नारायण का है।
“The Father, Himself, has come to make you Pure; He is teaching you RajYoga. No one can claim a high status without studying. *You know that Baba teaches you and makes you into (an ELEVATED Deity, like) Narayan from an ordinary human being. The aim and objective (picture of Lakshmi & Narayan) is in front of you. The status of a subject is not your aim and objective.* There is the picture of Lakshmi & Narayan (which is the aim and objective of this Study).”


*तो तुम बच्चों को कितना नशा रहना चाहिए। हम गॉड फादरली स्टूडेन्ट हैं, ईश्वर हमको पढ़ाते हैं।* गरीबों को ही बाप आकर पढ़ाते हैं। गरीबों के कपड़े आदि मैले होते हैं ना? तुम्हारी आत्मा तो पढ़ती है ना। आत्मा जानती है यह पुराना शरीर है। इनको तो हल्का-सल्का कोई भी कपड़ा पहनाया तो हर्जा नहीं है। इसमें कोई ड्रेस आदि बदलने की वा भभका करने की बात नहीं है। *ड्रेस के साथ कोई कनेक्शन ही नहीं।*
“ *You children should be so intoxicated that you are GodFatherly Students and that God is teaching you.* The Father comes and only teaches the poor. The clothes of poor people are dirty, is it not? You souls are now studying. The soul knows that he/she has an old body, and that it does not matter if you dress it in ordinary clothes. There is no question of changing your dress, or having any show, etc. *There is no connection with how you dress.* ”


भक्ति और ज्ञान। *भक्ति का जब अन्त हो, तब फिर बाप आकर ज्ञान दे। अभी है अन्त।* सतयुग में यह कुछ भी होता नहीं। अभी पुरानी दुनिया का विनाश आकर पहुँचा है। पावन दुनिया को स्वर्ग कहा जाता है। चित्रों में कितना क्लीयर समझाया जाता है। *राधे-कृष्ण ही फिर लक्ष्मी-नारायण बनते हैं, यह भी किसको पता नहीं है। तुम जानते हो दोनों ही अलग-अलग राजधानी के थे।*
“There is Knowledge, and there is Devotion. *Only when it is the end of Devotion, does the Father come and give you Knowledge. It is now the end.* None of these things exist in the Golden Age. The old world has now reached the stage when it is to be destroyed. The Pure World is called Heaven. This is explained very clearly in the pictures. *Radhe and Krishna, themselves, then become Lakshmi and Narayan. No one knows this either. You know that each belonged to a SEPARATE Kingdom.* ”


यहाँ तो आत्माओं को परमात्मा पढ़ाते हैं। *बाप कहते हैं - मैं आया भी हूँ साधारण तन में।* तो साधारण के पास साधारण ही आयेंगे। यह तो समझते हैं यह तो जौहरी था। बाप खुद रिमाइन्ड कराते हैं कि कल्प पहले भी हमने कहा था कि हम साधारण बूढ़े तन में आता हूँ। बहुत जन्मों के अन्त के भी अन्तिम जन्म में मैं प्रवेश करता हूँ।
“Here, the Supreme Father is teaching you souls. *The Father says - I have entered an ordinary body (of Dada Lekhraj).* Only ordinary ones would come to an ordinary being. You understand that this one (Dada Lekhraj) was a jewel merchant. The Father Himself reminds you of what He told you in the previous Cycle - I enter an ordinary, elderly body. I enter this one at the end of the last of his many births.”


हम गुप्त रीति अपनी राजधानी स्थापन कर रहे हैं। तुम कितने साधारण हो। पढ़ाने वाला कितना ऊंच ते ऊंच है, और निराकार बाप पतित शरीर में आकर बच्चों को ऐसा (लक्ष्मी-नारायण) बनाते हैं। दूरदेश से पतित दुनिया, पतित शरीर में आते हैं। सो भी अपने को लक्ष्मी-नारायण नहीं बनाते, तुम बच्चों को बनाते हैं। परन्तु पूरा पुरूषार्थ नहीं करते हो बनने के लिए। *दिन-रात पढ़ना और पढ़ाना है।*
“We are establishing our Kingdom in an incognito way. You are so ordinary, and the One who is teaching you is the Highest-on-High. The Incorporeal Father enters an impure body and makes you children become like them (Lakshmi and Narayan). He comes into the impure world from the faraway Land and enters an impure body. Nevertheless, He does not make Himself into Lakshmi or Narayan; He makes you children like them. However, you do not make complete effort to become like them. *Day and night, you have to Study, and (also) teach others.* ”
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Sakar Murli Points, Revised on 02.10.2021 (Previous Revision on 24.10.2016)

वह शिव, निराकारी, पूजा जाता है। उनको कहा जाता है ‘सुप्रीम फादर’। लौकिक बाप को ‘सुप्रीम’ नहीं कहा जाता। ऊंच ते ऊंच सभी आत्माओं का बाप एक ही (निराकार शिव) है। सभी जीव आत्मायें उस बाप को याद करती हैं। आत्मायें यह भूल गई हैं कि हमारा बाप कौन है! *पुकारते हैं, ‘ओ गॉड फादर, हम नयन हीन को नयन दो, तो हम अपने बाप को पहचानें।’*
“ Incorporeal Shiva is worshiped; He is called the ‘Supreme Father’. A corporeal father CANNOT be called the ‘Supreme’. The Highest-on-High, the Father of ALL (human) souls, is just One (Incorporeal Shiva). All embodied souls remember that (Incorporeal) Father. Souls have forgotten who their Father is. *They call out – ‘O God-Father! Give us, blind ones, (Spiritual) Vision so that we can ReCognise our Father’!* ”


यह भारत शिवबाबा का स्थापन किया हुआ शिवालय था। वहाँ पवित्रता थी, उस नई दुनिया में देवी-देवता राज्य करते थे। *मनुष्य तो यह भी नहीं जानते कि राधे-कृष्ण का आपस में क्या सम्बन्ध है। दोनों अलग-अलग राजधानी के थे, फिर स्वयंवर के बाद लक्ष्मी-नारायण बनें।* यह ज्ञान कोई मनुष्य मात्र में नहीं है। स्प्रीचुअल नॉलेज सिर्फ एक बाप ही देते हैं। अब बाप कहते हैं - आत्म-अभिमानी बनो।
“Bharat was the ‘Temple of Shiva’ (‘Shivalaya’), established by Shiv Baba. There was Purity there (in Golden Age), and the Deities used to rule in that New World. *Human beings do not even know what the relationship between Radhe and Krishna was. Each came from a SEPARATE kingdom; then, at their coronation, they became Lakshmi and Narayan.* No human being has this (Spiritual) Knowledge. Only One Father gives this Spiritual Knowledge. The Father says - now become soul-conscious!”


अब यह तो जानते हो एक है लौकिक बाप, दूसरा है पारलौकिक, तीसरा है अलौकिक। *अब पारलौकिक बाप शिवबाबा, ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण धर्म स्थापन करते हैं। ब्राह्मणों को देवता बनाने के लिए राजयोग सिखलाते हैं।* आत्मा ही पुनर्जन्म लेती है। आत्मा ही कहती है, ‘मैं एक शरीर छोड़ दूसरा लेती हूँ।’ बाप कहते हैं - अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो, तो तुम पावन बनेंगे। कोई भी देहधारी को याद नहीं करो!
“You know that - one is a corporeal (‘lokik’) father, the other is the Spiritual (‘Parlokik’) Father from beyond, and the third is the subtle (‘Alokik’) Father. *The Spiritual (‘Parlokik’) Father from beyond, Shiv Baba, establishes the Brahmin religion through Brahma (soul of Dada Lekhraj). He teaches RajYoga in order to change Brahmins into Deities.* It is souls who take rebirth. The soul says, ‘I shed a body and take another.’ The Father says - consider yourselves to be souls and Remember Me, your Father, and you will become Pure. Do not remember ANY bodily being!”
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Avyakt Vani Points 31.03.1988, Revised on 03.10.2021

आज रूहानी शमा अपने रूहानी परवानों को देख रहे हैं। चारों ओर के परवाने शमा के ऊपर फिदा अर्थात् कुर्बान हो गये हैं। कुर्बान वा फिदा होने वाले अनेक परवाने हैं, *लेकिन कुर्बान होने के बाद शमा के स्नेह में ‘शमा समान’ बनने में, कुर्बानी करने में नम्बरवार हैं। वास्तव में कुर्बान होते ही हैं दिल के स्नेह के कारण। ‘दिल का स्नेह’ और ‘स्नेह’ - इसमें भी अन्तर है।* स्नेह सभी का है, स्नेह के कारण कुर्बान हुए हैं।
“Today, the Spiritual Flame (Supreme Soul) is seeing His Spiritual Moths (souls). The Moths from all directions have merged in His Love - that is, they have surrendered themselves to the Flame. There are innumerable Moths who surrender themselves - that is, who merge in His Love. *However, after having surrendered, the ‘sacrifice’ of such souls, in which they become LIKE the Flame because of their Love for the Flame, is number-wise. In fact, they surrender because there is Love within their hearts. There is a difference between (deep) Love within the heart, and just having Love.* Everyone has Love, and it is because of Love that they have surrendered themselves.”


‘दिल के स्नेही’ बाप के दिल की बातों को वा दिल की आशाओं को जानते भी हैं और पूर्ण करते हैं। दिल के स्नेही दिल की आशायें पूर्ण करने वाले हैं। *दिल के स्नेही अर्थात् जो बाप के दिल ने कहा वह बच्चों के दिल में समाया। और जो दिल में समाया वह कर्म में स्वत: ही होगा।*
“The ones who have (deep) Love within their hearts are the ones who understand the feelings and aspirations within the Father’s Heart, and who ALSO fulfil them. The ones who have Love within their hearts are the ones who fulfil the aspirations of the Father's Heart. *Being Loving with the heart means that whatever has been spoken from the Heart of the Father is merged within the hearts of such children. Whatever is merged within their hearts will NATURALLY be seen in their actions.* ”


स्नेही आत्माओं के कुछ दिल में समाता है, कुछ दिमाग में समाता है। जो दिल में समाता है, वह कर्म में लाते हैं; जो दिमाग में समाता है, उसमें सोच चलता है कि ‘कर सकेंगे वा नहीं; करना तो है, समय पर हो ही जायेगा’। *ऐसे सोच चलने के कारण सोच तक ही रह जाता है, कर्म तक नहीं होता।*
“For those souls who have just Love, some things are merged within the heart and some things are merged in the mind. Whatever is merged within the heart is put into action. Many thoughts arise out of whatever is merged in the mind - such as, ‘can we do this or not; it has to be done, it will happen at the right time’. *Because of many thoughts like this, it only stays at the level of thought, but is not brought into action.* ”


आज बापदादा देख रहे थे कि कुर्बान जाने वाले तो सभी हैं। अगर कुर्बान नहीं जाते तो ब्राह्मण नहीं कहलाते। लेकिन बाप के स्नेह के पीछे, जो बाप ने कहा, वह करने के लिए कुर्बानी करनी पड़ती अर्थात् अपनापन, चाहे अपनेपन में अभिमान हो वा कमजोरी हो - दोनों का त्याग करना पड़ता है, इसको कहते हैं कुर्बानी। *कुर्बान होने वाले बहुत हैं, लेकिन कुर्बानी करने के लिए हिम्मत वाले नम्बरवार हैं।*
“So, today, BapDada saw that all of you are the ones who have surrendered yourselves. If you had not surrendered yourselves, you would not be called Brahmins. Out of Love for the Father, you have to make a ‘sacrifice’ for doing what the Father has said - that is, you have to renounce the consciousness of ‘My-ness’. Whether this ‘My-ness’ is of arrogance, or of weakness, BOTH have to be renounced. This is called a ‘sacrifice’. *There are many who surrender themselves, but those who have courage to make this ‘sacrifice’ (of My-ness) are number-wise.* ”
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Sakar Murli Points, Revised on 04.10.2021 (Previous Revision on 25.10.2016)

*यह तो समझाया है कि मनुष्य को कभी ‘भगवान’ नहीं कहा जाता।* तो अब जबकि बेहद का बाप मिला है, उसकी याद में ही करामत है। *जितना पतित-पावन बाप को याद करेंगे, उतना पावन बनते जायेंगे।* तुम अपने को अब पावन कह नहीं सकते हो, जब तक अन्त हो। जब सम्पूर्ण पावन बन जायेंगे तो यह शरीर छोड़ जाए सम्पूर्ण पवित्र शरीर लेंगे। जब सतयुग में नया शरीर मिले तब सम्पूर्ण कहेंगे।
“ *It has been explained to you that a human being can NEVER be called ‘Bhagwan’ (God).* Now that you have found the Unlimited Father, there is (Spiritual) MAGIC in His Remembrance. *The more you Remember the Purifier Father, the purer you will continue to become.* You cannot say that you are Pure at present; you cannot say this until the end. When you become completely Pure, you will shed your bodies and take completely pure bodies. When you receive a new body in the Golden Age, you will be considered to be (16 celestial degrees) COMPLETE.”


*शास्त्रों में जो गायन है, ‘अतीन्द्रिय सुख गोप-गोपियों से पूछो’, गोप-गोपियाँ तो तुम हो ना! तुम सम्मुख में बैठे हो।* तुम्हारे पास भी नम्बरवार हैं जिनको याद रहता है कि बाबा हमारा बाबा भी है, टीचर भी है, गुरू भी है। यह तो वन्डर है ना। लाइफ तक साथ देते हैं। गोद में लिया और पढ़ाई शुरू कर देते। तो यह याद रहने से भी खुशी बहुत रहेगी। परन्तु माया फिर यह भी भुला देती है।
“ *In the Scriptures, it is remembered, ‘ask the gopes and gopis about super-sensuous joy’; you are those gopes and gopis! You are sitting here FACE to FACE.* Among you too, you are number-wise in remembering that (Shiv) Baba is our Father also, Teacher also, and our Guru also. This is a wonder! He is your Companion for life (THROUGHOUT Confluence Age). As soon as He adopts you, the (Spiritual) Study begins. You will experience a great deal of Happiness by remembering even just this much. However, Maya makes you forget even this.”


बाबा तो राय देते रहते हैं। त्रिमूर्ति के चित्र तुम्हारे पास बहुत हैं। क्लीयर लिखा हुआ है, ‘वह शिवबाबा, यह वर्सा’। तुम बच्चों को यह चित्र देखने से बहुत खुशी होनी चाहिए। *बाबा से हमको विष्णुपुरी का वर्सा मिलता है।* पुरानी दुनिया तो खत्म होनी है। बस यह चित्र सामने रख दो, इसमें खर्चा तो कुछ भी नहीं है। झाड़ भी बहुत अच्छा है। रोज़ सवेरे उठकर विचार सागर मंथन करो। *अपना टीचर आपेही बनकर पढ़ो; बुद्धि तो सबको है। चित्र अपने घर में रख दो। हर एक चित्र में फर्स्टक्लास ज्ञान है।*
“Baba continues to advise you. You have many pictures of the Trinity (‘Trimurti’). It is clearly written - ‘that is Shiv Baba, and this is the inheritance (which you receive from Him)’. You children should have a great deal of Happiness when you see these pictures. *We are receiving the inheritance (of Sovereignty) of the ‘Land of Vishnu’ (RamRajya) from Baba.* The old world has to be destroyed. Simply keep these pictures in front of you; there is not much expense in that. The picture of the Tree is also very good. Wake up early, every morning, and churn the ‘Ocean of Knowledge’. *Become your OWN teacher and Study; everyone has an intellect. Just keep these pictures in your home. Every picture has first-class Knowledge.* ”


सामने चित्र लक्ष्मी-नारायण के रखे हैं। कृष्ण के लिए झूठी बातें लिख बदनामी कर दी है। झूठ माना झूठ, सच की रत्ती नहीं। *अब तुम समझते हो हम स्वर्ग के मालिक थे; फिर 84 जन्म ले, बिल्कुल शूद्र बुद्धि बन गये हैं।* क्या हाल हो गया है। अब फिर पुरूषार्थ कर क्या बनते हो! बाबा पूछते भी हैं ना कि तुम क्या बनेंगे? तो सब हाथ उठाते हैं, ‘सूर्यवंशी बनेंगे; हम तो मात-पिता को पूरा फालो करेंगे।’
“ The picture of Lakshmi & Narayan is placed in front of you. They have written false aspects about Krishna and defamed him. A lie means a lie; there is not a grain of truth in it. *You now understand that you were the Masters of Heaven; then, while taking 84 births, your intellects became completely those of ‘shudras’.* Look what your condition has become! What are you now becoming by making effort! Baba asks you what you will become? You all raise your hands - ‘we will become part of the Sun Dynasty; we will follow the Mother and Father completely’. ”


तुम बच्चों को यह भी साक्षात्कार हुआ है - कैसे गुफाओं, खानियों से जाकर सोने, हीरे आदि ले आते हैं। यह साइंस तुम्हारे सुख के लिए होगी। यहाँ है दु:ख के लिए - वहाँ एरोप्लेन भी फुलप्रूफ होंगे। बच्चों ने शुरू-शुरू में यह सब कुछ साक्षात्कार किया हुआ है। *पिछाड़ी में भी तुम बहुत साक्षात्कार करेंगे।* यह भी तुमने साक्षात्कार किया है - चोर लूटने आते हैं, फिर तुम्हारी शक्ति का रूप देख भाग जाते हैं। वह सब बातें पिछाड़ी की हैं। *चोर लूटने तो आयेंगे, तुम बाप की याद में खड़े होंगे तो वह एकदम भाग जायेंगे।*
“You children have also had visions of how gold and diamonds are brought from the caves and mines (in Golden Age). This science will exist (in Golden Age) for your Happiness. Here (in Iron Age), it exists for sorrow – there (in Golden Age), even airplanes will be foolproof. You children had visions of all these things in the very beginning. *At the end, too, you will have many visions.* You have also had visions of how thieves come to loot you, and how they run away, when they see your form of a Shakti. All of these things pertain to the end. *Thieves will come to loot you, but IF you are STABLE in Remembrance of the Father, they will run away.* ”
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Sakar Murli Points, Revised on 05.10.2021 (Previous Revision on 26.10.2016)

बाप को न जानने के कारण ही पतित बन पड़े हैं। *तमोप्रधान भी बनना ही है। फिर जब बाप आये तब सबको पावन बनाये।* आत्मायें निराकारी दुनिया में सब बाप के साथ रहती हैं। फिर यहाँ आकर सतो, रजो, तमो का पार्ट बजाती हैं। आत्मा ही बाप को याद करती है। *बाप आते भी हैं, कहते हैं - ब्रह्मा तन का आधार लेता हूँ, यह है भाग्यशाली रथ।*
“Because of not knowing the (Incorporeal) Father, souls have become impure. *Souls had to become ‘tamopradhan’. It is only when the Father comes that He can purify everyone (in Confluence Age).* All souls reside with the Father in the Incorporeal World. They then come down here and play their parts of ‘sato’, ‘rajo’ and ‘tamo’. It is souls who remember the Father. *The Father comes and says - I take the support of the body of Brahma; this one (soul of Dada Lekhraj) is the Lucky Chariot.* ”


कहते हैं, ‘जो बहुत भक्ति करते हैं उन्हें भगवान मिलता है।’ तो सबसे जास्ती भक्ति करने वाले को जरूर पहले मिलना चाहिए। बाप ने हिसाब भी बतलाया है। *सबसे पहले भक्ति तुम करते हो, तुमको ही पहले-पहले भगवान द्वारा ज्ञान मिलना चाहिए, जो फिर तुम ही नई दुनिया में राज्य करो।*
“They say that ‘those who perform a great deal of Devotion find God’. Therefore, those who do the MAXIMUM Devotion should surely find Him FIRST. Baba has told you about this account. *You are the FIRST ones to perform Devotion (from the beginning of Copper Age). You are the ones who should receive Knowledge from God FIRST (in Confluence Age) - so you can then rule (FIRST, in the Kingdom) in the New World.* ”


तुम तो कितने बड़े आदमी (देवता) बनते हो। दैवी गुण वाले देवता स्वर्ग के मालिक बनते हो। वहाँ तुम्हारे लिए महल भी हीरों-जवाहरों के होते हैं। वहाँ तुम्हारा फर्नीचर सोने जड़ित का फर्स्टक्लास होगा।
*यह है रूद्र ज्ञान यज्ञ। शिव को ‘रूद’ भी कहते हैं।* जब भक्ति पूरी होती है तो भगवान रुद यज्ञ रचते हैं।
“You are becoming such great people (Deities); you are becoming Deities with Divine virtues, the Masters (Sovereigns) of Heaven. There, you will have palaces studded with diamonds and jewels. There, your furniture will be first-class, inlaid with gold.
*This is the sacrificial Fire of the Knowledge of Rudra. Shiva is also called ‘Rudra’.* When Devotion ends, God creates the sacrificial Fire of Rudra.”


बाप आकर दिन बनाते हैं, तो बच्चों का भी बाप के साथ कितना लव होना चाहिए। बाप हमको विश्व का मालिक बनाते हैं। *मोस्ट बीलव्ड (most Beloved) बाबा है ना। उनसे ज्यादा प्यारी वस्तु कोई हो न सके।* आधाकल्प से याद करते आये हैं – ‘बाबा, आकर हमारे दु:ख हरो’। अब बाप आये हैं, समझाते हैं - बच्चे, तुम्हें अपने गृहस्थ व्यवहार में रहना ही है। यहाँ बाबा के पास कहाँ तक बैठेंगे? साथ में तो परमधाम में ही रह सकते। यहाँ तो नहीं रह सकते। यहाँ तो नॉलेज पढ़ने की है।
“The Father comes and brings the Day (of the Cycle); therefore, you children should have so much Love for the Father. The Father is making us into the Masters of the World. *(Shiv) Baba is the MOST Beloved. There is nothing (and NO ONE) lovelier than Him.* You have been remembering Him for half the Cycle and saying – ‘Baba, come and remove our sorrow’. The Father has now come and He explains - children, you DO have to stay within your house-hold. For how long would you stay here (in Madhuban) with (Shiv) Baba? You can stay with Him ONLY in the Supreme Abode (Soul World); you cannot stay with Him here. Here, you have to Study Knowledge.”


अब मोस्ट बीलव्ड शिव भी है, तो कृष्ण भी है। परन्तु वह (शिव) है निराकार, वह (कृष्ण) है साकार। निराकार बाप सभी आत्माओं का बाप है। हैं दोनों ‘मोस्ट बीलव्ड’। कृष्ण भी विश्व का मालिक है ना। अभी तुम जज कर सकते हो कि जास्ती प्यारा कौन? शिवबाबा ही ऐसा लायक बनाते हैं ना। कृष्ण क्या करते हैं? *बाप ही तो उनको (कृष्ण को) ऐसा बनाते हैं ना। तो गायन भी जास्ती उस (शिव) बाप का होना चाहिए ना।*
“Shiva, as well as Krishna, are both ‘most Beloved’. However, that One (Shiva) is Incorporeal, and this one (Krishna – same soul of Brahma Baba, or Dada Lekhraj) is corporeal. The Incorporeal Father is the Father of all (human) souls. Both are ‘most Beloved’. Krishna is also a Master (Sovereign) of the World. You can now judge who is lovelier. Only Shiv Baba makes you so worthy. What does Krishna do? *It is the Father who makes him (Krishna) become that. Therefore, there should be greater praise for that Father (Shiva).* ”
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Sakar Murli Points, Revised on 06.10.2021 (Previous Revision on 27.10.2016)

सतयुग में पहले-पहले होते हैं देवी-देवतायें। अब कलियुग में हैं असुर। *बाकी असुर और देवताओं की लड़ाई लगी नहीं। तुम इन आसुरी 5 विकारों पर योगबल से जीत पाते हो। बाकी कोई हिंसक लड़ाई की बात नहीं है।* तुम कोई भी प्रकार की हिंसा नहीं करते हो। तुम किसको हाथ भी नहीं लगायेंगे। तुम डबल अहिंसक हो। काम कटारी चलाना, यह तो सबसे बड़ा पाप है। बाप कहते हैं - यह काम कटारी आदि-मध्य-अन्त दु:ख देती है। विकार में नहीं जाना है।
“At first, in the Golden Age, there are Deities. Now, in the Iron Age, there are demons. *There was no war between demons and Deities. You are now conquering these devilish five vices with the ‘Power of Yoga’. It is NOT a question of a violent battle.* You do not commit any kind of violence. You would not even touch anyone (with an attitude of violence or lust). You are doubly non-violent. To use the ‘sword of lust’ is the greatest sin of all. The Father says - this vice of lust causes sorrow from its beginning through the middle to the end. You must not indulge in any vice.”


पहले शिव की भक्ति करते हो। फर्स्टक्लास मन्दिर बनाते हो, उनको ‘अव्यभिचारी’ भक्ति कहा जाता है। अब तुम ज्ञान मार्ग में हो। यह है अव्यभिचारी ज्ञान। एक ही शिवबाबा से तुम सुनते हो, जिसकी पहले तुमने भक्ति की - उस समय कोई और धर्म होते नहीं। ... *तुम एक बाप से ही ज्ञान सुनते हो। बाप कहते हैं - और कोई से तुम मत सुनो। यह है तुम्हारा अव्यभिचारी ज्ञान।* बेहद बाप के तुम बने हो।
“At first, you worship Shiva (from the beginning of Copper Age); you build first-class temples - that is called UNADULTERATED worship. You are now on the ‘path of Knowledge’. This is UNADULTERATED Knowledge (TRUE Gita). You listen to Shiv Baba, alone - the One whom you worship first; at that time there were no other religions. ... *You listen to Knowledge ONLY from One Father. The Father says – do not listen to anyone else. This is your UNADULTERATED Knowledge.* You now belong to the Unlimited Father.”


बाप से ही वर्सा मिलेगा - नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार। बाप थोड़े समय के लिए साकार में आया हुआ है। कहते हैं - मुझे तुम बच्चों को ही ज्ञान देना है। मेरा यह स्थाई शरीर नहीं है, मैं इसमें प्रवेश करता हूँ। *शिव जयन्ती से फिर झट गीता जयन्ती हो जाती है।* उनसे ज्ञान शुरू कर देते हैं। यह रूहानी विद्या सुप्रीम रूह दे रहे हैं।
“Only from the Father do you receive your inheritance - number-wise, according to the efforts you make. The Father has come into the corporeal form for a short time. He says - I have to give Knowledge only to you children. This is not My (own) permanent body; I have just entered this one. *After the (Divine) Birth of Shiva, there is immediately the ‘birth’ of the (TRUE) Gita.* It is from then that He begins to give Knowledge. The Supreme Soul is giving you this Spiritual Knowledge.”


विनाश के पहले जरूर स्थापना होनी चाहिए। किसको समझाओ – ‘पहले स्थापना, फिर विनाश।’ ब्रह्मा द्वारा स्थापना। प्रजापिता मशहूर है - आदि देव, आदि देवी - जगत अम्बा के लाखों मन्दिर हैं। कितने मेले लगते हैं। *तुम हो जगत अम्बा के बच्चे ज्ञान-ज्ञानेश्वरी, फिर बनेंगी राज-राजेश्वरी।*
“Establishment definitely has to take place before destruction. When you explain to others, tell them that ‘establishment is first, and then there is destruction’. Establishment takes place through Brahma. PrajaPita (Brahma) is very well known - there is Adi Dev and Adi Devi - there are hundreds of thousands of temples to JagadAmba. So many fairs (melas) take place. *You are ‘Gyan-Gyaneshwari’ (ones who are filled with Knowledge, number-wise), the children of JagadAmba; and you then become ‘Raj-Rajeshwari’ (Princes & Princesses – number-wise).* ”
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Sakar Murli Points, Revised on 07.10.2021 (Previous Revision on 28.10.2016)

अब शास्त्रों की कोई भी बात बाप नहीं सुनाते। कोई भी भगत को ज्ञान सागर नहीं कहेंगे। न उनमें ज्ञान है, न ज्ञान सागर के बच्चे हैं। ज्ञान सागर बाप को कोई नहीं जानते हैं। न अपने को बच्चा समझते हैं। *वह सब भक्ति करते हैं भगवान से मिलने के लिए। परन्तु भगवान को जानते नहीं, तो भक्ति से क्या फायदा होगा? ... हम कोई भी मनुष्यों से शास्त्रों का कुछ वाद-विवाद नहीं कर सकते।*
“The Father does not tell you any aspect of the Scriptures. None of the devotees can be called ‘the Ocean of Knowledge’. Neither do they have Knowledge, nor are they the children of the ‘Ocean of Knowledge’ (as yet). None of them knows the Father, the ‘Ocean of Knowledge’; nor do they consider themselves to be His children (as yet). *They all perform Devotion in order to meet God, but they do not know God (ACCURATELY), and so what benefit would they receive by performing (such) Devotion? ... We CANNOT have a debate about the Scriptures with other people.* ”


तुमको तो यह ज्ञान सुनाने वाला है एक ही रूहानी बाप। वह एक ही बार आकर समझाते हैं। अब हमको कोई मनुष्य से कुछ भी सीखना नहीं है। तुमको अब स्प्रीचुअल बाप से ही सुनना है। सुनने वाले हैं रूहानी बच्चे, आत्मायें। वह सब मनुष्य, मनुष्य को सुनाते हैं। *यह है रूहानी बाप का ज्ञान। वह है मनुष्यों का ज्ञान। ... तो तुम बच्चों को कोई से डिबेट नहीं करनी है।*
“It is ONLY One Spiritual Father who gives you this Knowledge. Only once (within one Cycle) does He come to explain to you (during Confluence Age). Now we do not have to learn anything from ANY human being. Now, you must listen ONLY to the Spiritual Father. It is Spiritual children, souls, who listen to Him. All of those human beings relate to human beings. *This is Knowledge (TRUE Gita) from the Spiritual Father (Shiva); whereas, that is knowledge (FALSE Gita) from human beings. ... So, you children should not debate with ANYONE.* ”


*बाप कहते हैं - ज्ञान की अथॉरिटी, ज्ञान सागर मैं हूँ। मैं तुमको कोई शास्त्र आदि नहीं सुनाता हूँ। हमारा यह है रूहानी ज्ञान।* बाकी सब है जिस्मानी ज्ञान। वह सतसंग आदि सब भक्ति मार्ग के लिए हैं। यह रूहानी बाप बैठ रूहों को समझाते हैं, इसलिए देही-अभिमानी बनने में बच्चों को मेहनत लगती है।
“ *The Father says - I am the ‘Authority of Knowledge’, the ‘Ocean of Knowledge’; I do not relate any Scriptures, etc., to you. This Knowledge of Mine is Spiritual;* whereas, all other knowledge is of physical aspects. Those spiritual gatherings, etc., are for the ‘path of Devotion’. The Spiritual Father sits and explains to you souls. This is why children feel that it takes effort to become soul-conscious.”


बाप अब कहते हैं - मुझे याद करो, तो तुम्हारे ऊपर जो पापों का बोझा है वह उतर जायेगा और तुम पवित्र बन जायेंगे। *जो पवित्र बनेंगे वही पवित्र दुनिया का मालिक बनेंगे।* अभी पुरानी दुनिया बदलनी है। कलियुग के बाद सतयुग आना है। सतयुग है पावन दुनिया। कलियुग में ही मुझे बुलाते हैं कि ‘आकर पावन दुनिया बनाओ’। सो मैं अब आया हूँ - मामेकम् याद करो।
“The Father now says - Remember Me, and the burden of sin that is on you will be removed, and you will become Pure. *Those who become Pure will become the Masters of the Pure World (Heaven).* The old world now has to change. After the Iron Age, the Golden Age has to come. The Golden Age is the Pure World. It is only in the Iron Age that people call out to Me to ‘come and purify the world’. So, I have now come - constantly Remember Me, ALONE!”
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SM & AV points for churning – Revised in 2021

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Sakar Murli Points, Revised on 08.10.2021 (Previous Revision on 29.10.2016)

तुम बच्चों को तो बाप मिला है, उनसे वर्सा मिल रहा है, इसलिए बाप को याद करते हो। तुमको शिवबाबा मिला है, दुनिया को नहीं मिला है। *जिनको मिला है, वह भी अच्छी रीति चल नहीं सकते।* बाबा के डायरेक्शन बड़े मीठे हैं - आत्म-अभिमानी भव, देही-अभिमानी भव। बात ही आत्माओं से करते हैं। *देही-अभिमानी बाप, देही-अभिमानी बच्चों से बात करते हैं।*
“You children have found the Father, and you are receiving your inheritance (of Heaven) from Him - and this is why you should continue to Remember the Father. You have found ShivBaba; the world has not found Him. *EVEN those who have found Him are not able to move along very well.* Baba's directions are very Sweet - may you be soul-conscious; may you have the consciousness of being bodiless. He only speaks to souls. *The soul-conscious Father speaks to soul-conscious children.* ”


वहाँ तो हैं ही निराकारी आत्मायें, बिन्दी। बिन्दी से तो मिल न सकें। तो शिवबाबा से कैसे मिलेंगे? *इसलिए यहाँ समझाया जाता है - हे आत्मायें, अपने को आत्मा समझ बुद्धि में यह रखो कि हम शिवबाबा से मिलते हैं। यह तो बड़ा गुह्य राज़ है ना।* कइयों को शिवबाबा की याद नहीं रहती है। बाबा समझाते हैं - हमेशा शिवबाबा को याद करो। शिवबाबा आपसे मिलने आते हैं।
“There (in the Soul World), there are only incorporeal souls, Points. You cannot meet a Point. So, how could you meet Shiv Baba (as a POINT)? *This is why it is explained here - O souls, consider yourselves to be souls and let your intellects remember that you are meeting Shiv Baba (through a body of an embodied soul). This is a very deep secret.* Many are unable to Remember Shiv Baba. Baba explains - constantly Remember Shiv Baba. Shiv Baba comes to meet you.”


ड्रामा अनुसार दिन-प्रतिदिन ज्ञान की प्वाइंट्स गुह्य होती जाती हैं। तो चित्रों में भी चेंज (change) होगी। बच्चों की बुद्धि में भी चेंज होती है। आगे यह थोड़ेही समझते थे कि शिवबाबा बिन्दी है। ऐसे थोड़ेही कहेंगे कि पहले ऐसा क्यों नहीं बताया। *बाप कहते हैं - सब बातें पहले ही थोड़ेही समझाई जाती हैं। बाप ज्ञान का सागर है, तो ज्ञान देते ही रहेंगे। करेक्शन (correction) होती रहेगी।* पहले से ही थोड़ेही बता देंगे। फिर आर्टीफिशयल हो जाए।
“According to Drama, the points of Knowledge are becoming deeper day by day; and so, CHANGES also take place in the pictures. CHANGE also takes place in the intellects of you children. Previously, you did not understand that Shiv Baba was a POINT (source of Vibrant, Luminous Spiritual Light Energy). You should not ask why you were not told this earlier. *The Father says - everything cannot be explained at the beginning. The Father is the ‘Ocean of Knowledge’, and so He would continue to give Knowledge. CORRECTIONS would CONTINUE to take place.* He would not tell you everything in advance. In that case, it would seem artificial.”


ड्रामा में जो हुआ सो राइट। बाबा ने भी जो कहा सो ड्रामा अनुसार कहा। ड्रामा में मेरा पार्ट ऐसा है। बाबा भी ड्रामा पर रख देते हैं। मनुष्य कहते हैं – ‘ईश्वर की भावी’। ईश्वर कहते हैं - ड्रामा की भावी। ईश्वर ने बोला या इसने बोला, ड्रामा में था। *कोई उल्टा काम हुआ, ड्रामा में था, फिर सुल्टा हो जायेगा।*
“Whatever happens in Drama is right (ACCURATE). Whatever Baba said, He said that according to Drama. Such is My part in Drama! Baba also leaves everything to Drama. People say that ‘it is the Will of God’. God says – it is the Destiny of Drama. Whether God said something, or this one (Brahma Baba) said something, it was in Drama. *If something ‘wrong’ takes place, that was in Drama, and it will be put right again (according to Drama).* ”
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Sakar Murli Points, Revised on 09.10.2021 (Previous Revision on 31.10.2016)

मैं आया हूँ तुमको अमरपुरी का मालिक बनाने। *वहाँ जब तुम राज्य करेंगे तो मृत्युलोक का कुछ भी याद नहीं पड़ेगा। नीचे उतरते-उतरते हम क्या बनेंगे, वह भी मालूम नहीं रहता। नहीं तो सुख ही उड़ जाए।* यहाँ तो तुमको सारा चक्र बुद्धि में रखना है। बरोबर स्वर्ग था, अब नर्क है - तब तो बाप को बुलाते हैं। तुम आत्मायें शान्तिधाम की रहने वाली हो। यहाँ आकर पार्ट बजाती हो। यहाँ से तुम संस्कार ले जायेंगे घर। फिर वहाँ से आकर नया शरीर धारण कर राज्य करेंगे।
“I have come to make you into the Masters of the ‘Land of Immortality’ (RamRajya). *When you rule there, you do not remember anything of the ‘land of death’ (Ravan Rajya). You are even unaware of what you will become as you continue to come down. Otherwise, you would lose your Happiness.* Here, you have to keep the whole Cycle within your intellects. Truly, it was Heaven; and it is now Hell, which is why people call out to the Father. You souls are residents of the ‘Land of Peace’ (Soul World). You come here to play your parts. You will carry your sanskars back Home with you; and you will then come from there, take new bodies, and rule (in the New World).”


*बाप कहते हैं - जो चाहिए सो लो। चाहे विश्व के मालिक राजा, रानी बनो, चाहे फिर दास-दासी बनो - जितना पुरुषार्थ करेंगे।* बाप सिर्फ कहते हैं - एक तो पवित्र बनो, और हर एक को बाप का परिचय देते रहो। अल्फ को याद करो, तो बे बादशाही तुम्हारी! बाप को याद करने में ही माया बहुत विघ्न डालती है। बुद्धियोग तोड़ देती है। बाप कहते हैं, जितना मुझे याद करेंगे तो पाप भी भस्म होंगे और ऊंच पद भी पायेंगे, इसलिए भारत का प्राचीन योग मशहूर है।
“ *The Father says - you can claim whatever you aspire. You can become a King or Queen, a Master (Sovereign) of the World; or you can become a maid or a servant - it depends on how much effort you make.* The Father simply says - first of all, become Pure, and continue to give everyone the Father's introduction. Remember Alpha (‘Alif’) - and then, Beta (‘Bey’), the Sovereignty, is yours! It is in your Remembering the Father that Maya causes many obstacles; she breaks the Yoga of your intellect. The Father says - the more you Remember Me, the more your sins will be absolved, and the higher the status you will claim. This is why the ancient Yoga of Bharat is very famous.”


*बाप कितना प्यार से बैठ समझाते हैं। बच्चे, यह एक जन्म अगर पावन बनेंगे, तो 21 जन्म पावन दुनिया के मालिक बनेंगे।* पवित्रता में तो सुख है ना। तुम पवित्र दैवी धर्म वाले थे। अब अपवित्र बन दु:ख में आये हो। स्वर्ग में निर्विकारी थे, अभी विकारी बनने से नर्क में दु:खी हुए हो। बाप तो पुरूषार्थ करायेंगे ना। स्वर्ग के महाराजा-महारानी बनो। तुम्हारे बाबा, मम्मा बनते हैं ना, तो तुम भी पुरूषार्थ करो, इसमें मूँझने की कोई बात ही नहीं।
“ *The Father sits and explains to you with so much Love. Children, if you remain Pure for this one birth, you will become the Masters (Sovereigns) of the Pure World for 21 births.* There is Happiness in purity. You belonged to the pure Deity religion, and have now become impure and are experiencing sorrow. You were viceless when you were in Heaven. Now, by becoming vicious, you have become unhappy in Hell. The Father enables you to make effort - become Emperors and Empresses of Heaven. Your Mama (Om Radhe – Saraswati) and Baba (Dada Lekhraj – Brahma) become this, and so you too should make efforts for this. There is nothing to be confused about in this.”


*मोस्ट स्वीट बाबा को जितना याद करेंगे उतना वर्सा मिलेगा। तुम बहुत धनवान बनेंगे।* बाप तुमको ऐसा नहीं कहते हैं कि माथा टेको, मेले मलाखड़े में जाओ – नहीं! घर में बैठे बाप और वर्से को याद करो – बस! बाप है बिन्दी - उनको परमपिता परमात्मा कहा जाता है। सुप्रीम सोल, सबसे ऊंच ते ऊंच है। बाप कहते हैं - मैं भी बिन्दी हूँ, तुम भी बिन्दी हो। सिर्फ भक्ति मार्ग के लिए मेरा बड़ा रूप बनाकर रखा है - नहीं तो बिन्दी की पूजा कैसे करें? उनको कहते भी हैं शिवबाबा।
“ *The more you Remember the MOST Sweet Father, the more inheritance you will receive, and the wealthier you will become.* The Father does not tell you to bow down (to anyone), or go to fairs, etc - no! Remember the Father and your inheritance, while sitting at home – that’s all! The Father is a POINT (source of Vibrant, Luminous Spiritual Light Energy) - He is called the Supreme Father Supreme Soul. He is the Supreme Soul - the highest of all. The Father says – I, too, am a POINT - and you are also Points. It is just that those on the ‘path of Devotion’ have made a huge form (of a Lingam) to represent Me - otherwise, how could a POINT be worshiped? He is called Shiv Baba.”
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Avyakt Vani Points 11.08.1988, Revised on 10.10.2021

सबका स्नेह, स्नेह के सागर में समा गया। ऐसे ही सदा स्नेह में समाये हुए, औरों को भी स्नेह का अनुभव कराते चलो। बापदादा सर्व बच्चों के विचार समान मिलने का सम्मेलन देख हर्षित हो रहे हैं। उड़ते आने वालों को सदा उड़ती कला के वरदान स्वत: प्राप्त होते रहेंगे। बापदादा सर्व आये हुए बच्चों के उमंग-उत्साह को देख सभी बच्चों पर स्नेह के फूलों की वर्षा कर रहे हैं। *संकल्प समान मिलन, और आगे संस्कार बाप समान मिलन - यह मिलन ही बाप का मिलन है। यही बाप समान बनना है। संकल्प मिलन, संस्कार मिलन - मिलना ही निर्माण बन, निमित्त बनना है।* समीप आ रहे हो, आ ही जायेंगे।
“Everyone’s Love has merged in the ‘Ocean of Love’. Remain constantly merged in Love in this way, and also continue to enable others to experience (Spiritual) Love. BapDada is pleased to see the meeting in which all the children’s ideas are similar. Those who come flying here will always automatically continue to receive Blessings of the constantly flying stage. Seeing the zeal and enthusiasm of all the children who have come here, BapDada is showering them with Flowers of Love. *The meeting in which your thoughts are in harmony, and in which your sanskars become equal to those of the Father – such a meeting is to Meet the Father. This is what it means to become EQUAL to the Father. To harmonise thoughts, to harmonise sanskars - this harmonising is to become humble and to be an instrument.* You are coming close, and you will come closer.”


स्नेह मिलन में आये हो, सदा स्नेही बन स्नेह की लहर विश्व में फैलाने के लिए। लेकिन हर बात में ‘चैरिटी बिगन्स एट होम’। पहले स्व है अपना सबसे प्यारा होम। तो पहले स्व से, फिर ब्राह्मण परिवार से, फिर विश्व से। *हर संकल्प में स्नेह, नि:स्वार्थ सच्चा स्नेह, दिल का स्नेह, हर संकल्प में सहानुभूति, हर संकल्प में रहमदिल, दातापन की नैचुरल नेचर बन जाए - यह है स्नेह मिलन, संकल्प मिलन, विचार मिलन, संस्कार मिलन।* सर्व के सहयोग के कार्य के पहले, सदा सर्व श्रेष्ठ ब्राह्मण आत्माओं का सहयोग विश्व को सहयोगी सहज और स्वत: बना ही लेता है, इसलिए सफलता समीप आ रही है। मिलना और मुड़ना अर्थात् मोल्ड होना - यही सफलता का चुम्बक है। बहुत सहज इस चुम्बक के आगे सर्व आत्मायें आकर्षित हो आई कि आई!
“You have come to this ‘Meeting of Love’ (‘sneh-milan’) in order to become constantly Loving and to spread waves of Love throughout the world. However, as for everything, ‘charity begins at home’. First is our most beloved home of all – the self. So, first begin with yourself, then with the Brahmin Family, and then with the world. *In every thought, let there be Love – TRUE, altruistic Love, Love from the heart. In every thought, let there be sympathy and mercy; let your natural nature become that of a bestower – this is a TRUE ‘Meeting of Love’, where there is the harmony of thoughts, harmony of ideas, and harmony of sanskars.* Before the project involving everyone’s co-operation (‘Global Co-operation for a Better World’), the co-operation of all the elevated Brahmin souls, at all times, will easily and automatically make the world co-operative. This is why success is coming close. The Magnet for success is to meet and to change - that is, to mould oneself. All souls will, very easily and very soon, be attracted here through this Magnet.”
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Adam
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SM & AV points for churning – Revised in 2021

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Sakar Murli Points, Revised on 11.10.2021 (Previous Revision on 01.10.2016)

अब इस तमोप्रधान झाड़ का विनाश, और नई देवी-देवता धर्म के झाड़ की स्थापना जरूर चाहिए। संगम पर ही होगा। अभी तुम हो संगम पर। आदि सनातन देवी-देवता धर्म का अभी सैपलिंग लग रहा है। पतित मनुष्यों को बाप पावन बना रहे हैं, वह फिर देवता बनेंगे। *जो पहले नम्बर में थे, जिन्होंने 84 जन्म लिए हैं, वही फिर पहले नम्बर में आयेंगे!*
“Now, there definitely has to be the destruction of this ‘tamopradhan’ Tree, and the establishment of the new (‘Satopradhan’) Tree of the Deity religion. This only takes place at the Confluence Age. You are now at the Confluence Age. The sapling of the original eternal Deity religion is now being planted. Impure human beings are being purified by the Father, and they will then become Deities. *Only those who were the number one souls, who took (the complete) 84 births, will become the number one souls again!* ”


सुखधाम है बेहद के बाप का वर्सा; दु:खधाम है रावण का वर्सा। अब जितना श्रीमत पर चलेंगे, उतना ऊंच बनेंगे। फिर प्रसिद्ध हो जायेंगे कि कल्प-कल्प यह ऐसे ही पुरूषार्थ करने वाले हैं। यह कल्प-कल्प की बाजी है। *जो जास्ती पुरूषार्थ कर रहे हैं वह अपना राज्य भाग्य ले रहे हैं।* ठीक पुरूषार्थ नहीं किया होगा तो थर्ड ग्रेड में चला जायेगा।
“The ‘Land of Happiness’ is the inheritance of the Unlimited Father (Shiva); the ‘land of sorrow’ is the inheritance of Ravan. The more you follow Shrimat, the more elevated you will become. You will then become well known as the ones who make this type of effort every Cycle. This is a game of every Cycle. *Those who make greater effort claim this fortune of Sovereignty.* Someone who does not make effort very well would go into the third grade.”


लौकिक बाप भी कहते हैं, ‘तुम हमारा नाम बदनाम करते हो, निकलो घर से बाहर’। बेहद का बाप भी कहते हैं - तुमको माया का थप्पड़ ऐसा लगेगा जो सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी में आयेंगे ही नहीं - अपने आपको चमाट मार देंगे। बाप तो कहते हैं वारिस बनो। *राजतिलक लेना चाहते हो तो मुझे याद करो, और औरों को भी याद दिलाओ, तो तुम राजा बनेंगे।* नम्बरवार तो होते हैं ना।
“A corporeal father also says, ‘you are defaming my name, get out of this house’. The Unlimited Father also says - you will be slapped by Maya in such a way that you will not be able to be part of the Sun Dynasty, or the Moon Dynasty - you slap your own self. The Father says - become heirs (Sovereigns – like Lakshmi & Narayan). *If you wish to claim a tilak of Sovereignty, Remember Me, and also remind others (to Remember Me), and you will become a Sovereign.* You all become number-wise.”


यहाँ एक धर्म, एक मत अथवा पीस कैसे हो सकती है? जितना माथा मारते हैं एक मत होने के लिए उतना ही लड़ते हैं। बाप कहते हैं - अब मैं उन सबको आपस में लड़ाए, माखन तुमको दे देता हूँ। बाप समझाते हैं - जो करेगा सो पायेगा। कोई-कोई बच्चे बाप से भी ऊंच बन सकते हैं। *तुम मेरे से भी साहूकार विश्व के मालिक बनोगे - मैं नहीं बनूँगा। मैं तुम बच्चों की निष्काम सेवा करता हूँ, मैं दाता हूँ।*
“How can there be one religion and one belief here, that is, how can there be Peace here? The more they ‘break their heads’ for the establishment of one belief, the more they fight. The Father says - I now enable them to fight among themselves, and I give you the Butter (of Sovereignty of the New World). The Father explains - those who perform will achieve. Some children go even higher than their father. *You will become even wealthier than Me, and become the Masters (Sovereigns) of the World - I do not become that. I serve you children altruistically, I am the Bestower.* ”
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Adam
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SM & AV points for churning – Revised in 2021

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Sakar Murli Points, Revised on 12.10.2021 (Previous Revision on 03.10.2016)

ज्ञान मार्ग में गीत आदि नहीं गाया जाता है, न बनाया जाता है, न जरूरत है क्योंकि गाया हुआ है – ‘बाप से सेकेण्ड में जीवनमुक्ति का वर्सा मिलता है’। उसमें गीत आदि की कोई बात ही नहीं। *तुम जानते हो हमें बेहद के बाप से बेहद का वर्सा मिलता है। जो भक्ति मार्ग की रसम-रिवाज है, वह इसमें नहीं आ सकती।* बच्चे कविता आदि बनाते हैं, वह भी औरों को सुनाने के लिए। वह भी जब तक तुम नहीं समझाओ, तब तक कोई समझ न सके।
“Neither should songs, etc., be sung on the ‘path of Knowledge’, nor should songs be composed here. There is no need for them (here), because it is remembered that ‘you receive your inheritance of Liberation-in-Life, in a second, from the Father’. There is no question of songs, etc., in that. *You know that you are receiving the unlimited inheritance (of Sovereignty) from the Unlimited Father. The systems and customs of the ‘path of Devotion’ cannot continue here.* The poetry, etc., that children write is for reciting to others, but even that cannot be understood by them, until you explain it to them personally.”


रावण राज्य में भी भभका देखो कितना है - यह है पिछाड़ी का भभका। राम-राज्य सतयुग में होगा - वहाँ यह विमान आदि सब थे, फिर यह सब गुम हो गये। फिर इस समय यह सब निकले हैं। अभी यह सब सीख रहे हैं। *जो सीखने वाले हैं, वह संस्कार ले जायेंगे। फिर आकर वहाँ विमान बनायेंगे। यह तुमको भविष्य में सुख देने वाले हैं।* यह विमान आदि भारतवासी भी बना सकते हैं। कोई नई बात नहीं। अक्लमंद तो हैं ना। यह सांइस तुमको फिर काम आयेगी। अभी यह सांइस दु:ख के लिए है, फिर वहाँ सुख के लिए होगी।
“Look how much splendour there is in the kingdom of Ravan - this is the splendour of the final period (of the Iron Age). There will be the Kingdom of RAMA (Shiva) in the Golden Age. All of those airplanes (‘vimans’), etc., existed there, and then they all disappeared. All of those things have now emerged again. They are now learning everything. *Those who are learning these things will carry those sanskars with them, and they will then go and build those vimans there. They will give you Happiness in the future.* Even the people of Bharat can build those vimans, etc. - they are nothing new. People are clever. This science will be useful to you later on. Science is now causing sorrow; whereas, it will give you Happiness there.”


यह बातें किसकी समझ में जल्दी नहीं आयेंगी। *जब तकदीर में हो तब कुछ समझें।* ... भारत में यह कायदा है, स्त्री को कहते हैं, ‘तुम्हारा पति ईश्वर है, उनकी आज्ञा पर चलना है, पति के पांव दबाना है’, क्योंकि समझते हैं लक्ष्मी ने नारायण के पांव दबाये थे। यह आदत कहाँ से निकली? इन झूठे (भक्ति मार्ग के) चित्रों से। सतयुग में तो ऐसी बातें होती नहीं।
“No one is able to understand these aspects very quickly. *It is only when they have it in their fortune that they are able to understand.* ... It is the system in Bharat that a bride is told that ‘her husband is her god, that she has to obey his orders, and she has to massage his feet’. This is because they believe that Lakshmi massaged the feet of Narayan. Where did that custom emerge from? From the false pictures (of the ‘path of Devotion’). Such things do not occur in the Golden Age.”


अब तुम जानते हो हम एक बाप के बच्चे हैं, आपस में भाई-बहन हो गये। ‘दादे’ से वर्सा लेते हैं। बाप को बुलाते भी पतित दुनिया में हैं – ‘हे पतित-पावन, सब सीताओं के राम’। मनुष्य ‘राम-राम’ जपते हैं तो सीता को थोड़ेही याद करते हैं। उनसे बड़ी तो लक्ष्मी है। परन्तु याद तो एक बाप को करते हैं। लक्ष्मी-नारायण को फिर भी जानते हैं, शिव को तो कोई जानते नहीं। *आत्मा बिन्दी है, तो आत्माओं का बाप भी बिन्दी होगा ना!*
“Now, you know that you are children of One Father, and so you are (Spiritual) Brothers and Sisters. You are claiming your inheritance from the ‘Grand-Father’ (ShivBaba). You call out to the Father to come into the impure world – ‘O Purifier; O Rama of Sita’! People chant RAMA’s name, but they do not remember Sita at that time. Lakshmi is greater than Sita. However, they are (actually) remembering One Father (Shiva). They know Lakshmi and Narayan, but no one knows Shiv Baba. *A soul is a Point (source of Vibrant, Luminous Spiritual Light Energy), and the Father of souls is also a POINT (source of Vibrant, Luminous Spiritual Light Energy).* ”


अगर बच्चा तुम्हारी आज्ञा नहीं मानता है, तो बच्चा, बच्चा नहीं। वह तो कपूत ठहरा। आज्ञाकारी, फरमानबरदार बच्चा हो, तो वर्से का हकदार बन सकता। बेहद का बाप भी कहते हैं - मेरी श्रीमत पर चलेंगे, तो तुम ऐसे श्रेष्ठ बनेंगे। नहीं तो प्रजा में चले जायेंगे। *बाप तुमको नर से नारायण बनाने आये हैं। यह है सच्ची सत्य नारायण की कथा। तुम राजाई प्राप्त करने आये हो।* अब मम्मा-बाबा राजा-रानी बनते हैं, तो तुम भी हिम्मत करो।
“If your son does not obey you, then that son is not your son; he is disobedient. If a son is obedient and follows all orders, he can claim a right to the inheritance (of his corporeal father). The Unlimited Father also says - if you follow my Shrimat, you will become elevated. Otherwise, you will become part of the subjects. *The Father has come to change you from ordinary humans into (an ELEVATED Deity, like) Narayan. This is the TRUE Story of the TRUE Narayan. You have come here to attain your Sovereignty.* Mama and Baba become the Queen and King (Sovereigns), and so you should also have courage (to become Sovereigns like them).”


*जो बाप को ही नहीं जानते, वह हैं नास्तिक। तुम बाप और रचना को जानते हो, तुम हो आस्तिक।* लक्ष्मी-नारायण आस्तिक हैं या नास्तिक? ... इस समय तुम आस्तिक बनकर वर्सा पा रहे हो। फिर वहाँ याद ही नहीं करते हो। यहाँ याद करते हैं, परन्तु उनको जानते नहीं हैं, इसलिए ‘नास्तिक’ कहा जाता है। वहाँ जानते भी नहीं, तो याद भी नहीं करते। उन्हों को यह भी पता नहीं होगा कि यह वर्सा हमको शिवबाबा से मिला है। लेकिन उनको ‘नास्तिक’ नहीं कहेंगे क्योंकि पावन हैं।
“ *Those who do not know the Father are atheists. You know the Father and the creation, and so you are theists.* Are Lakshmi & Narayan atheists or theists? ... You become theists and receive your inheritance at this time. Then, you will not Remember Him there (in Golden Age). People here remember Him, but they do not know Him (ACCURATELY), and so they are ‘atheists’. There (in Golden Age), they neither know Him nor do they Remember Him. There, they are unaware that they received their inheritance from Shiv Baba (in Confluence Age), but they cannot be called ‘atheists’ (there) because they are Pure.”
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